आज 14 नवम्बर को एक बार फिर





बधाई हो वतन कि आज बाल दिवस है।
कलंक का तिलक तुम्हारे भाल दिवस है।

वस्तुस्थिति से दूरियां लूटेंगी कब तलक?
सलाम की मजबूरियां छूटेंगी कब तलक?
ग़ुलाम की ये बेड़ियां टूटेंगी कब तलक?
खड़कते हुए साठवाँ ये साल दिवस है।
कलंक का तिलक तुम्हारे भाल दिवस है।

आज़ाद तो हुए मगर स्वतन्त्र कहाँ हैं?
जनता तो बहुत हो गई जनतंत्र कहाँ है?
कुर्सी पे बैठने का ही षड्यंत्र यहाँ है।
"हाथ" में सत्ता का ये बहाल दिवस है।
कलंक का तिलक तुम्हारे भाल दिवस है।

इक पार्टी जो भर गई गगरी थी पाप की।
जिसने तो छीन ली थी लंगोटी भी आप की।
इस देश को समझ रहे जागीर बाप की।
उस सांप को अपनी बगल में पाल दिवस है।
कलंक का तिलक तुम्हारे भाल दिवस है।

फिर देश को चट कर गए ये देश के गोरे।
भर भर के इटली जा रहे थे नोटों के बोरे।
ले वोट गरीबी का दिए "हाथ" कटोरे।
बधाई हो, इस देश का कंगाल दिवस है।
कलंक का तिलक तुम्हारे भाल दिवस है।

सारे जहाँ से अच्छा ये हिंदोस्तान है।
आज़ादी का मतलब यहाँ इक खानदान है।
हर मूर्ख भी इस वंश का सबसे महान है।
वतन कहाँ का, बाप का ये माल दिवस है।
कलंक का तिलक तुम्हारे भाल दिवस है।

हर पालतू कुत्ते को बांट देते ये सम्मान हैं।
तुष्टिकरण इनकी राजनीति की पहचान है।
धर्म की निरपेक्षता तो एक पायदान है।
तो आज सेक्युलरिज़्म का हलाल दिवस है।
कलंक का तिलक तुम्हारे भाल दिवस है।

पंडित जो पंडितों से उनका घर ही ले गया।
जो देश के बढ़ने का सुअवसर ही ले गया।
जो चीन को ज़मीन साथ सर भी दे गया।
सियार के सिँह ओढ़ने की खाल दिवस है।
कलंक का तिलक तुम्हारे भाल दिवस है।

शेखर को जिसने कर दिया गोरों के हवाले।
सुभाष चंद्र बोस गए देश निकाले।
पटेल को रस्ते से जो धोखे से हटाले।
गद्दार के अवतरण का मलाल दिवस है।
कलंक का तिलक तुम्हारे भाल दिवस है। 

-पुनीत गुप्ता



फ़ोटो क्रेडिट: सामान्यज्ञान. इन

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