टैक्स हेवन और पैराडाइस पेपर्स क्या है ?





ऐसे संस्थानों को आम भाषा में टैक्स हेवन कहा जाता है जहाँ आसानी से कर बचाया जा सकता है और धन के स्रोत को छुपाया जा सकता है . इंडस्ट्री की भाषा में इन्हें ऑफ़शोर फ़ाइनेंसियल सेंटर्स (ओएफ़सी) कहा जाता है. ये आमतौर पर स्थिर, भरोसेमंद और गुप्त होते हैं और अक्सर छोटे द्वीप होते हैं लेकिन ऐसा नहीं है कि ये सिर्फ़ द्वीप ही होते हैं, इनमें ग़लत कार्यों को रोकने के लिए क्या उपाय हैं इसे लेकर भिन्नताएं हो सकती हैं.

क्या हैं पैराडाइज पेपर्स ? 

पैराडाइज़ पेपर्स जनता के सामने आने वाले वो वित्तीय दस्तावेज़ हैं जो दुनिया भर के अमीर और ताक़तवर लोगों के टैक्स हेवन देशों में बड़े निवेशों पर रोशनी डालते हैं. ये बड़ी संख्या में लीक दस्तावेज़ हैं, जिनमें ज़्यादातर दस्तावेज़ आफ़शोर क़ानूनी फर्म ऐपलबी से संबंधित हैं. बरमुडा स्थित ये कंपनी क़ानूनी सेवाए देती है. ये अपने ग्राहकों को शून्य या बेहद कम कर वाले देशों में कंपनियां स्थापित करने में मदद करती है.

कंपनी का इतिहास साल 1890 से शुरू होता है. 

मेजर रेगीनाल्ड एपलबी ने बरमूडा में इस कंपनी की शुरुआत की थी आगे चल कर इस कंपनी ने आयल ऑफ़ मैन , गर्न जी ,जर्सी ,बरमूडा ,कैमन आइलैंड ,ब्रिटिश वर्जिन आइलैंड ,शंघाई ,सेसल्स ,हांगकांग ,मारीशस इत्यादि में ऑफिस खोले . ये दुनिया में वित्तीय संस्थानों और अमीरो को क़ानूनी सलाह देने वाली ऑफशोर कम्पनिओ में नंबर एक मानी जाती है.

पैराडाइज़ पेपर्स नाम इसलिए चुना गया क्योंकि जिन देशों के नाम इसमें आए हैं, उन्हें दुनिया की ख़ूबसूरत जगहों में गिना जाता है. इसमें बरमूडा भी शामिल है जहां मुख्य कंपनी 'ऐपलबी' का हेडक्वॉर्टर है.


इन देशों में टैक्स हेवन यानी कर चोरी का स्वर्ग कहे जाने की तमाम खूबियां हैं.

तमाम जानकारियां इस बात पर केंद्रित हैं कि कैसे राजनेताओं, बहुराष्ट्रीय कंपनियों, सेलेब्रिटी और हाई प्रोफ़ाइल लोगों ने ट्रस्ट, फाउंडेशन, काग़ज़ी कंपनियों के ज़रिए टैक्स अधिकारियों से अपने कैश और सौदों को छुपाए रखा.इन दस्तावेज़ों से राजनेताओं, सेलिब्रेटी, कारपोरेट जाइंट्स और कारोबारियों के वित्तीय लेनदेन का पता चलता है.

पिछले सालों में इसके पहले विकीलीक्स(2010) , ऑफशोर लीक्स (2013), लक्ज़म्बर्ग लीक्स(2014) स्विस लीक्स (2015),बहामा लीक्स(2016) व् पनामा लीक्स (2016) जैसे मामले भी सामने आ चुके है.

हालांकि पनामा पेपर्स आकार के लिहाज से ज़्यादा बड़े थे लेकिन पैराडाइज पेपर्स में जानकारियों और सूचना का पैमाना कहीं बड़ा है. इन्हें पनामा पेपर्स के दस्तावेज़ों से ज़्यादा सख्त माना जा रहा है.

पिछले साल के पनामा पेपर्स की ही तरह ये दस्तावेज़ जर्मन अख़बार ज़्यूड डॉयचे त्साइटुंग ने हासिल किए. इन 1.34 करोड़ दस्तावेज़ों की जांच इंटरनेशनल कंसोर्शियम ऑफ़ इंवेस्टिगेटिव जर्नलिस्ट्स (आईसीआईजे) ने की है. 67 देशों के क़रीब 100 मीडिया संस्था इसमें शामिल हैं,

दस्तावेज़ों की जांच करने वाले मीडिया संस्थानों का कहना है कि ये जांच जनहित में हैं, क्योंकि टैक्स हेवन देशों से लीक हुए दस्तावेज़ों से बार-बार ग़लत काम सामने आए हैं. 

सार्वजनिक हुए इन दस्तावेज़ों की वजह से दुनिया भर में कई देशों में सैंकड़ों जांच शुरू हुए हैं और नतीज़तन राजनेताओं, मंत्रियों और यहां तक कि प्रधानमंत्रियों का अपना पद छोड़ना पड़ा है.


By - विश्वजीत चंद्रा



फ़ोटो क्रेडिट : दैनिक भास्कर

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