चोटों ने इन क्रिकेट खिलाड़ियों के कैरियर की लंका लगा दी।

By - सूरज मौर्या


जाबड़ क्रिकेटीय प्रतिभा, अनुशासित खेल और बेहतरीन शारीरिक सौष्ठव के बावजूद कई क्रिकेट खिलाड़ियों का कैरियर सत्यानाश हो गया। हालाँकि कुछ खिलाड़ी ऐसे भी है जिन्होंने गंभीर चोटों के बावजूद दमदार वापसी की।

झारखण्ड के एक तेज गेंदबाज है जिनका अच्छा खासा शरीर है और बेहतरीन शार्ट लेंथ डिलीवरी फेंकते है, टीम से अक्सर अंदर-बाहर होते रहते है। नाम उनका वरूण अरोन है। उन्हें हैमस्ट्रिंग इंजरी और पेशियों में खिंचाव मने क्वाड्रसिप्स की समस्या रहती है। फ़िलहाल वो राष्ट्रीय टीम से अनिश्चितकालीन प्रवास पर है मने उनकी एंट्री की कोई सम्भावना नहीं दिखती।

कर्नाटक के एक खिलाड़ी जिनके बल्लेबाजी क्रमांक की ख़ूब चर्चा होती है कि उन्हें फलां नंबर पर भेजा जाए। अपने अनिश्चित बैटिंग आर्डर की तरह के. एल.राहुल के लिए चोट भी गंभीर समस्या रही है। कर्नाटक के ही दूसरे बल्लेबाज़ मनीष पांडे जो मिडिल आर्डर के सबसे मुफ़ीद बल्लेबाज है हाल फिलहाल में। उन्हें भी पक्ष तनाव मने साइड स्ट्रेन के कारण अपने अन्तर्राष्ट्रीय क्रिकेट के शैशव काल में टीम से बाहर बैठना पड़ा।

यूपी की पैदाइश और बंगाल के लिए हुनर आजमाइश करने वाले तेज गेंदबाज मोहम्मद शमी भी घुटनों में लगने वाली निरन्तर चोटों की वजह से अपनी स्वाभाविक लय और पेस को कायम करने में नाकामयाब रहते है, शुरूआती दौर में गजब की लाइन-लेंथ थी इस गेंदबाज़ के पास। मगर अब अंदर-बाहर की प्रक्रिया से ये खिलाड़ी एक औसत गेंदबाज बनकर रह गया है।

बंगाल के ही दूसरे खिलाड़ी मनोज तिवारी जो बल्लेबाजी करते है। वो भी कंधे और घुटने की चोटों से खूब परेशान रहते है। आईपीएल में इस खिलाड़ी का प्रदर्शन बेहद शानदार रहता है। हालाँकि अन्तर्राष्ट्रीय क्रिकेट में इस खिलाड़ी ने कोई ख़ास छाप नहीं छोड़ी है।

दिल्ली के तेज गेंदबाज इशांत शर्मा जो पिछले एक दशक से टेस्ट स्कॉड का हिस्सा है। वो भी अपने घुटने, टखने और हैमस्ट्रिंग चोटों से कैरियर में उतार-चढ़ाव झेलते रहे है। दिल्ली के ही तेज गेंदबाज आशीष नेहरा जिनका नाम चोट लगने वाले खिलाड़ियों की सूची में टॉप स्पॉट के लिए गिनीज़ बुक में भी शामिल किया जा सकता है। उनके टखने की चोट की वजह से वो लंबे समय तक क्रिकेट से दूर रहे है ओर उनके संन्यास लेने के बाद भी उन्हें इस समस्या से आराम नहीं मिला है।





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