कविता: हमारी दोस्ती।





पीपल की गहरी छाया में
पकती हमारी दोस्ती
घनघोर...

पुरवाई की शरारत  
तो पश्चिमा का विस्वास है 
हमारी दोस्ती

नदी की गहरी छाती में
पैठी ठंडक है
हल्के, उजले आसमानी
बादलों के उसपार 
दहकते सूरज की ताप है 
हमारी दोस्ती

फूलों की कलियों पर 
मंडराते दीवाने भौंरे कि तरह 
आशिक मिजाज है 
हमारी दोस्ती

जवान होती रात की
गर्माहट को 
ठंडी आंखों से निहारते चांद की तरह 
शरारतनामा है 
हमारी दोस्ती

मंदिर के घंटे-घड़ियाल 
कि चैतन्य 
तो,
दरगाह की सूफियाना पंगत है 
हमारी दोस्ती
उमंग, उत्साह और मलंग 
मस्ती-ठहाका दर्शन का
पर्याय है 
हमारी दोस्ती

विनम्र, वैचारिक और बेजोड़ 
रहबरदार के साथ तलबगार है 
हमारी दोस्ती

विदा लेती सभ्यता के 
इतिहास की जिम्मेदारी
तो,
ठसक-खांटी खानदानी है
हमारी दोस्ती 
हमारी दोस्ती......

-पवन मौर्य

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