भाजपा के आईटी सेल से एक भारी चूक हो गयी है।



फेसबुक पर लिखी गयी अधिकतर राजनीतिक पोस्ट मेन  की खबरों का रिएक्शन होती हैं. जब खबरें ज्यादा पढ़ी नही जा रही हैं, तो फेसबुक इस्तेमाल करने वाले लोगों के लिए यह जगह खबरों का सहज जरिया बनती जा रही है. इसने विचारों की दुनिया में खबरों की पहुंच औऱ उनके प्रभाव के क्षेत्र में  इंकलाबी काम किया है लेकिन इस क्रांति के अपने खतरे भी सामने आ रहे हैं.

पार्टियों के आईटी सेल, जिन्हें हम आज के सात- आठ साल पहले न के बराबर जानते थे, खबरों की दुनिया मे अफवाहों का नया मार्किट ले कर आ गए हैं. यह अफवाहें या झूठी, प्लांटेड सूचनाएं खबरों की कटपीस होती हैं, जिन्हें कई बार टुकड़ों में काटकर या शब्द बदल कर नया रूप दे दिया जाता है. इससे झूठ खबर के प्रारूप में प्रेषित किया जाता है. यह खबरें सच लगती तो हैं पर होती नही है.

यह एक शातिर कला है और इसी क्लास के इस्तेमाल के लिए पार्टियों के आईटी सेल में 6 लाख से 12 लाख पैकेज दे कर देश के बेहतर संस्थानों से पढ़ कर आये लड़के बैठाए जाते हैं. यह हर खबर पर बारीक निगाह रखते हैं और फिर उन्ही खबरों के जरिये नई खबर बना देते हैं, जो बनावट के तौर पर आपको विशुद्ध खबर लगती है लेकिन पढ़ने के बाद आप पर पार्टी का प्रभाव  पड़ चुका होता है.

पोलिटिकल फंडिंग की वजह से इस प्रोफेशन में पैसे की कमी नही है, इसलिए यह शातिर दिमागों के लिए बूमिंग एरिया है. अच्छे दामों पर उत्तम गुडवत्ता के वीडियो एडिटर हायर किये जा रहे हैं. यह असली वीडियो को एडिट कर उससे तमाम दूसरे अर्थ पैदा कर देते हैं. 

हाल फिलहाल में राहुल गांधी का एक वीडियो भाजपा के आईटी सेल ने ट्वीट किया, वो भी अपने आधिकारिक ट्वीटर एकाउंट से. कैम्पेन कि दुनिया में इसे मूर्खता कहते हैं क्योंकि फेक खबरे, या एडिटेड आइटम अक्सर निष्पक्ष दिखने वाले पचास - साठ फर्जी एकाउंट से फैलाई जाती है इसके बाद पार्टी का आईटी सेल इन्हें शेयर करता है. यह फेक खबर को प्रमाणिक इमेज प्रदान करने का स्थापित तरीका है. 

राहुल गांधी का आलू से सोना वाला वीडियो जैसे ही वायरल हुआ उसके तुरन्त बाद असल वीडियो आ गया. चूंकि असली वीडियो स्थापित  तरीके से निष्पक्ष लोगों द्वारा शेयर किया गया तो यह तरीका अब भाजपा गुजरात के लिए बैक फायर कर गया. यह भाजपा आईटी सेल की प्रोफेशनल गलती थी .

हालांकि हमने इस वाकये से क्या सीखा? जिन लोगों ने राहुल गांधी का एडिटेड वीडियो शेयर किया है, उन्हे अपने फ्रेंड सर्किल में कमअक्ल औऱ पड़ताल न करने वाले आदमी के रूप में देखा जा सकता है.

जिस भी विषय पर हम लिख रहे हैं या शेयर कर रहे हैं,  यदि उसकी समझ फेसबुक से बनी है तो एक बार उस विषय पर पड़ताल करना बहुत जरूरी है, नही  तो हमारा वही हाल हो सकता है,जो अब राहुल के एडिटेड वीडियो को शेयर करने वालों का हो रहा है.

(राहुल गांधी के आलू वाले भाषण का असली वीडियो कमेंट बॉक्स में है.)



By - आशुतोष तिवारी 

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