चुनाव की कहानी, मेरी जुबानी - ख़ुला घूंघट, निकली प्रत्याशी!




महिलाओं को सशक्त बनाने के लिए नगर निकाय के कुछ वार्डों की सीटें महिलाओं के लिये आरक्षित कर
दी जाती है। बँगले की चहारदिवारी में सोलहों सिंगार करके केवल किटी पार्टी में जाने वाली बड़े घर की महिलाएं अचानक से बड़े-बड़े होर्डिंग पे अवतरित हो गयी हैं।

झुंड में अपनी किटी सहेलियों संग मेहंदी-महावर और माथे पे लंबी टिकुली लगाये महिला प्रत्याशी जब इडलब्ल्यूएस कॉलोनी से निकलती है तो अधेड़ और नवजात वृद्ध पुरूषों की ख़ुशी देखते ही बनती है। एक और विशेषता है इन महिलाओं की, इनके हाथों में कोहनी से हल्की छोटी लंबाई के मोबाइल होते है।

इनमें से एक महिला का काम होता है कि हर बीस फर्लांग पे प्रत्याशी का क्लोज़अप लेती एक फ़ोटो खींचे और उस पेज़ पे डाल दें जो खास प्रत्याशी महोदया के चुनाव प्रबंधन हेतु बनाया गया है, इसके अलावा वो सेल्फी भी लेती है, जिसमे महिलाएं अपनी-अपनी योग्यता भर मुँह को न्यून कोण पे घुमाकर फ़ोटो क्लिक कराती है। एक जनी गाँव से आयी है जो जमींदार परिवार की लगती है वो सबकी साथिन बनने के चक्कर में मुँह क्या अधिक कोण पे घुमा देती है। ये देखकर फ़ोटो मैनेजर साहिबा कहती है सत्यानाश।

अच्छा ये किटी वीमेन कितना भी मॉडर्न हो जाये, अभी भी प्रचार उसी महिला का करती है जो उनकी अपनी जाति से है। हाँ अगर ऑप्शन न हो तो थोड़ा लिबरल होके अपने वर्ग की महिलाओं को सपोर्ट करती है। 

इनका चुनावी प्रचार भी महज दिखावा और मुंहदिखाई है। इन्हें तो चुनावी मुद्दों और नगर निकाय में किये जाने वाले कार्यों तक का अता पता नहीं है। चुनावी मुद्दे के नाम पर ये बस इतना कहती है कि हम आपकी नाली दुरूस्त कर देंगे, मानो नगरपालिका का काम सिर्फ नाली सफाई ही है। असली खेला तो इनके पति महोदय ही खेल रहे है। और हाँ! ये जीत भी जाये तो इन्हें करना वही है जो चुनाव के पहले करती थी। सभासदी तो पति महोदय ही करेंगे 'सभासद पति' के नाम से।


By - संकर्षण शुक्ला


नोट- इस लेख में उन महिलाओं की बात की है जो खड़ी नहीं हुई है बल्कि उन्हें खड़ा किया गया है अपने पति की बैसाखी के सहारे।


फ़ोटो क्रेडिट : प्रभात खबर

Comments