धाकड़ राइटर खुशवंत सिंह की एक ज़माने की पड़ोसन।




लम्बी काले घने केश जो कमर के नीचे तक मचलते थे, मोटी तीखी तराशे हुए होंठ, गोल भरा हुआ चेहरा, उभरा हुआ मांसल सामान्य कद काठी का यौवन, गले में मोटी सफ़ेद और काली मोतियों की सामान्य माला. 

मुस्कुराने पर जो सम्मोहन और आकर्षण फूटता था वो सहज ही प्राकृतिक सौन्दर्य की तरह अपने आनंद में विभोर करने वाला होता था. गोरी हथेलियों में काले, पीले, हरे और गुलाबी के साथ बैगनी ब्रेसलेट के रंगों आपस में गूँथ कर स्मृतियों का गढ्ड-गढ़ बना देने वाली वो पेंटिग्स !


अमृता शेरगिल का वो बेबाक बोल्डनेस, जिसकी मूरत को कैनवास पर उतरने में कूची भी शरम से बगले झांकने लगे. धाकड़ राइटर खुशवंत सिंह की एक ज़माने में पड़ोसन रहीं अमृता अपने हुश्न और कला के जौहर से एक नया मुकाम पाया और कई किस्से कामुक किन्तु सत्य की रचाधार्मिता बनी.

यहूदी ओपेरा गायिका मां मेरी एंटोनी गोट्समन और सिख पिता उमराव सिंह शेरगिल की संतान है।

उनके बारे में एक किवदंती चर्चे आम है..वो ‘निमफोमेनिया’ से ग्रसित थी, सेक्स, उसके जीवन में वहीँ स्थान रखता था जो किसी मुफलिस के लिए रोटी. 
प्रेमी पुरुष के सोते समय कम से कम एक रात में 6-7 हम बिस्तर होती थी. (ऐसे किस्सों में कम ही सत्यता पाई जाती है, और ये उनका निजी मसला है).

बदरुद्दीन तैयब जी ने कहीं लिखा है- 

अमृता बहुत खुले और स्पष्टवादी युवती थी, जो प्रेम और अभिव्यक्ति के बीच की खाई को पाटने में खुद ही पहल करती थी. और पुरुष या गैर मर्द जब तक झिझकता तब तक वह शेरगिल के यौवन के सम्मोहन में गिरफ्तार पता था. 

संयुक्त अमिरिका के प्रख्यात लेखक माल्कोम मुगरिज अमृता के साथ अपने अनुभवों को साझा करते हुए बताते है कि उन दिनों मेरी जवानी के दिन थे, सप्ताह भर शिमला में अमृता के साथ निजी समय बिताने पर मेरा जो हाल हुआ...मैं ही जनता हूँ.
किस्से तो और भी है...




By - पवन मौर्य ( बनारस के बैचलर है शब्दों की नजाकत और चयन ने इन्हें बनारस से महाराष्ट्र में ला खड़ा कर दिया है। )



फ़ोटो क्रेडिट : अमृता द्वारा बनाई गयी एक तस्वीर।

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