आज सुबह की डायरी से।





यह एक दूसरी सुबह होती है.लगता है, आप दुख की खोह से बाहर निकल आये हैं. ज़िन्दगी का बुलावा आपके दिन के दरवाजे पर इतनी मामूली सी दस्तक दे सकता है, मुझे ताज्जुब होता है.

कभी जब , पिछली रात मन उदास  हो कर सोया हो, तो तमन्ना कोई क्यों करे, कि ज़िन्दगी अभी रास्ते मे है. वह आएगी और दिन की पहली दस्तक उसकी हथेलियों की होगी.

उठना, पिछले रोज से जल्दी और उस उनींदी हालत मे सुबह की सैर करना . कॉफी पी लेना उस दुकान पर जहां, आते हुए सूरज की रौशनी झिलमिलाती हो. घूमना, बिना सोचे औऱ घर आकर ब्रश करते हुए कोई पुराना रिकॉर्ड बजा देना , जिसे सुने हुए अरसा हो गया. फोन पर अहले- वफ़ाई करते हुए गुमशुदा हो जाना, उस लड़की से, जो सिर्फ तुम्हारे लिए इस दुनिया मे आयी है.

ज़िन्दगी जीने का यही सलीका होता है क्या.

यह अजीब बात है. सबने कहा, यह आम ज़िन्दगी है. योगदान विरोधी. यह सिर्फ समय को गुजारना है. एक खास तरह की ऊंचाई तक पहुंचने के लिए एक खास तरह की ज़िन्दगी जीनी पड़ती है..ब्ला..ब्लॉ

मैंने कहा, शैतान! ,दफा हो जा. जब ऊंचाई तक पहुंचने की हसरत के साथ जीत था तो सीने में नफरत के गुबार लेकर चलता था. जलन से मन जला हुआ रहता था. अब सुकून की नींद तो होती है. मकसद शब्द से मेरा कोई ताल्लुक नही है.

यह हर्फ़ एक ठहर रही ज़िन्दगी के है, जिसको कभी जल्दी से खत्म करने की बड़ी उजलत थी.

कुछ भी नही हूँ. इतिहास के नाम पर बोदा हूँ ,यदि इतिहास प्यार के किस्से संकलित नही करता. ज़िस्म में अब युद्ध की कोई खरोंच नही चाहता, वह युद्ध जिसे मेरेे साथी आगे बढ़ने की अफवाह में लड़े जा रहे हैं.

मुझे भी चाहिए शरीर पर निशान , पर युद्ध के नही, प्यार के लिए प्यासे उसके ओंठों के और जल्दबाजी में आक्रामक निकोटों के.

खुदा मुझे बख्श देना, मेरी इबादत का खुदा अब एक नई जिंदगी है. सुबह की सैर,  चाय, पुराने रिकार्ड ओर वो.

मुझे उम्मीद है , कि यह आवारा ज़िन्दगी ही जी सकने के नए दरवाजे खोलेगी. एक रोज बारिश होगी और फिर गर्मियां आएंगी. मैं इन मौसमों के साथ इनका हमशक्ल बन कर रहूंगा.

कि ज़िन्दगी सुख है, आसान है और वफादार है.

आशु ( आज की डायरी से)

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