मानुषी छिल्लर के लिए अपार स्नेह और सम्मान का न्यौछावर कर रहे फेसबुकिया।







नौजवानो/नवयुवतियो,

आपके इस आभासी स्त्री प्रेम और सम्मान के लिए हृदय से शुक्रिया। परसों रात से म्हारी छोरियाँ छोरों से कम थोरे है जैसे स्लोगन लिख-लिख के चरस बो दिए है। पहली बात तो ई है कि ये केवल छोरियों की ही प्रतियोगिता थी, इसमें छोरे प्रतिभाग ही नहीं करते। जो प्रतिभाग नहीं करते तो कम-ज्यादा का सवाल ही नहीं है।



मन एकदम बरमूडा ट्राइएंगल जैसा हो गया था ये देख के कि कल तक जो दीपिका पादुकोण की नाक काटने पे फ़ेसबुकिया नीला समर्थन कर रहे थे, आज वही मानुषी को भर कठौता बधाई उड़ेल रहे थे। इतने दोहरे चरित्र के साथ कैसे जी लेते हो सर&मैडम जी।

कइयों को तो हम जानते है कि जिनके घर में महिलाओं के लिए इंटरमीडिएट के बाद सीधा मैरिज सर्टिफिकेट के लिए अप्लाई करवा दिया जाता है, वो कबीलाई आदम के संघाती भी हमारी बिटिया कैसी हो, मानुषी छिल्लर जैसी हो के नारे फ़ेसबुक पे चेंपे थे। 

उ कहावत है न कि घर के देवता लल्लाहे और बाहर के देव पूंजे जाए। उसी तरह यहाँ पे भी महतारी-बाप एकदम मॉडर्न पेरेंट्स नियन बातें मसक रहे है मगर घर में बिटिया को कोचिंग भेजते है तो सख्त निर्देश के साथ की 7 बजे से एक मिनट भी इधर-उधर नहीं होना चाहिए। अगर लड़की को  वापसी में 5 मिनट भी लेट हो जाता है तो अगले दिन से घर पे बिठा देते है। इस ताने के साथ कि कौन सा तुझे आईएएस-पीसीएस बनना है, पास तो बिना कोचिंग के भी हो जाओगी। वही लाट साहब शाम का कह के निकलेंगे और सुबह 7 बजे भी आएंगे तो एक बार भी ये पूछने की हिम्मत न होगी कि बेटवा रात भर का किये ?



अच्छा लाट साहब भी कल से एकदम बधाई मोड में आ गए है। जैसे रक्षाबंधन में आ जाते है। अपनी बहन को राखी के बदले रक्षा का वचन देते हुए कहते है कि ख़बरदार जो तुमने किसी की तरफ़ आँख उठा के देखी और जो तुम्हारी तरफ़ किसी ने देखी तो आँखें नोंच लेंगे। बहनों की कैदिया रक्षा करने वाले ये ठेकेदार टाइप भाई मन ही मन एक और प्रतिज्ञा लेते है कि तुमको किसी को देखने नहीं दूंगा और दूसरे की बहन को अंखियन से ओझल न होने दूंगा। 

मतलब की सलाह के साथ,
संकर्षण शुक्ला


Photo credit : Manushi Chhillar facebook page

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