सीजर ने अपनी मौत तक क्लियोपैट्रा से प्रेम किया।



‘उसकी खूबसूरती दैवीय थी. उसे देखना सुख और रोमांच से भर देता था.’ यह बात रोम के इतिहासकार कैसिअस डियो अपनी किताब में लिखा, वो भी, क्लियोपैट्रा के मरने के 200 साल बाद. पॉम्पे जो सीजर का दामाद था इसकी हत्या के बाद तिलस्म और रोमांच के बीच क्लियोपैट्रा के बारे में ये जानना भूल जाते हैं कि एक खूबसूरत चेहरे से ज्यादा एक खूबसूरत दिमाग थी वो. 

पुरुषवादी समाज में पली बढ़ी और विरोधाभाषों से दो चार हुई थी. और तो और महज 14 की उम्र में ही उसकी महत्वाकांक्षा जाग गई थी. इसको पाने के लिए क्लियोपैट्रा हर तरह से तैयार थी. नतीजा आपके सामने है किवदंती.

क्लियोपेट्रा नाम सुनते ही ग्रीक सहित दुनिया भर के लोग आज भी मचल जाते हैं, वह टालमी वंश की राजकुमारी जिसे किस नाम से विभूषित किया जाए... शब्द ही नहीं मिलते. क्लियोपेट्रा को लेकर सदियों से अब तक कई किवदंतियों का प्रमाणिक उपन्यास गढ़ा जा चूका है. जिसपर हमें भरोसा करने भर का समय नहीं है, हम तो बस उसके किस्सगोई समंदर में डूबकर ज्यादा से ज्यादा मज़ा लेना चाहते है. क्या-क्या संज्ञा नहीं मिली- मक्कार, धोखेबाज, ऐय्याश और मनमौजी राजकुमारी. जो योवन के आरम्भ में आहात हुई भावनाओं का मरहम ढूढंने में हुस्न से लेकर अपने हर उस चीज को झोंक देती है. जिसे समाज डूबकर आनंद लेता है.

पुरुषवादी समाज से धिक्कारे जाने का जो घाव उसके लरजते सपने पर उभरा, उसका मरहम खोजने में क्लियोपेट्रा किसी फैसले को लेने में नहीं हिचकती है. क्लियोपैट्रा अपने भाई टोलेमी शासन कार्यों में हाथ बंटाने वाली स्त्री इसा कदर बेवफा होगी, जिसकी सहज ही कल्पना नहीं की जा सकती.

राजेश खन्ना के लिए किशोर दा फिल्म दुश्मन में गाया गया गाना "वादा तेरा वादा.. वादे पे तेरे मारा गया बंदा मैं सीधा सादा " ....जूलियस सीजर के लिए बिल्कुल फिट बैठता है. 

उस दिन सीजर अपने सिंहासन पर लाव लश्कर के बैठा था. क्लियोपैट्रा एक सुनहरे संदूक में भरकर,गद्दे में लिपटकर आई. और सैनिकों ने गद्दे में लिपटी क्लियोपैट्रा को सीजर के सामने खोल दिया. मनचले आशिकों के फितूर को मरहूम कर, गोल घूमती हुई क्लियोपैट्रा सीजर के क़दमों पर रुकी. बला की खूबसूरत लड़की, भरी जवानी, यौवन के सावन से लदकद तराशा बदन, सीजर के क़दमों में पड़ी थी. सीजर को पता नही चला उसका दिल कब फिसल कर क्लियोपैट्रा के हुस्न में कैद हो गया ? सीजर जो एपीलप्सी का मरीज था, उसके चंगुल में फंसा गया. उस दिन से अपनी मौत तक सीजर ने क्लियोपैट्रा से प्रेम किया. 

कैसिअस डियो आगे लिखते हैं की क्लियोपैट्रा का शरीर भरा हुआ था. मतलब आज की बॉलीवुड वाली जीरो फिगर नहीं थी. नाक औसत से ज्यादा पर शरीर के अनुरूप थी लंबी थी. उस दौर के ढाले हुए पुराने सिक्कों में क्लियोपेट्रा को देखेंगे, आप दांग रह जायेगे. कह उठेगे यह तो सामान्य सी औरत है. लेकिन लिखने वालों ने क्या खूब लिखा है कि उसकी आवाज लोगों पर जादू कर देती थी. जैसे सपेरे के बीन की मीठी कम्पित आवाज पर नागिन झुमने लगाती है, ठीक वैसे ही उसके ज्ञान और जानकारी के आगे बड़े-बड़े पंडित टांग फैला पसर जाते थे. 

जैसे ही रात के अँधेरे में दिया जलने के थोड़े ही देर में रौशनी में आकर्षित होकर पतंगे परवाना बन जल उठाते है. ठीक उसी प्रकार, क्लियोपैट्रा की महज मौजूदगी में ही कुछ ऐसा था कि आस-पास के लोग सम्मोहित होने लगते थे. शराब, चरस, गांजा और अफीम की बात छोड़ो, क्लियोपेट्रा के नशे को पूरा करने के लिए ये नशीले पेय कम पड़ रहे थे. नशे की भूख मिटने के लिए, अत्यंत ही जहरीले सांपों द्वारा अपने आप को डसवाने लगी. यहाँ तक की डसवाने अर्थात नशे की पूर्ती के लिए एक जहरीले नस्ल का सर्प भी पाल लिया. जिस सर्प का नाम आगे बताया गया है. 

क्लियोपेट्रा का जीवन जितना तिलस्म और किस्सागोई वाला रहा, उससे ज्यादा मौत ने सस्पेंस पैदा किया. क्लियोपेट्रा ने सीजर के मौत के बाद आत्महत्या कर ली. इसके आत्महत्या के तरीकों से आपको चौकना नहीं चाहिए. अपने आप को ताबूत में बंद कर एक विशेष प्रकार के "अस्पा" नामक जहरीले सर्प से अपने स्तन पर डसवा लिया. फिर मदमस्त होकर उसने अपने प्राण त्याग दिए. बात इतने से ही नहीं खत्म होती. एक दिन अचानक चोरों ने उसकी कब्र खोद डाली और ताबूत से उसे बाहर निकाला. फिर लगातार एक हफ्ते में सैकड़ों लोगों ने उसकी बेजान शरीर के साथ अपनी अपनी कामपिपासा शांत की.  तो क्या हुआ इसे कहते हैं ज़िंदादिली. 


By - पवन मौर्य 

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