रात में जागती आँखें- रात को बच्चे वह देख लेते हैं जो उन्हें नहीं देखना चाहिए।



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सोनल यानी चिंटू अब ५ साल का हो गया था , बच्चे आज कल अंग्रेजी माध्यम में पढ़ते हैं इसलिए पहली कक्षा में वह ५ साल के पहले नहीं आ पाते . आजकल बच्चे वैसे भी बहुत होशियार पैदा हो रहे हैं जिन्हें पैदाइश मोबाइल की समझ होती है , दूसरों के सामने आप उन्हें डांट नहीं सकते उनकी बेज़्ज़ती हो जाती है , जबकि हम जब बच्चे थे तो मोहल्ले भर के सामने पीटते थे घरवाले दिखा दिखाकर. 

चिंटू को उसके माँ बाप ने सारी सुविधाएं देकर रखी थीं, बच्चे को छोटा समझकर मिस्टर चौधरी और उनकी पत्नी उसे अपने पास ही सुलाते थे. जैसा अक्सर हर माँ बाप करते हैं . एक रोज़ मिस डिसूज़ा ने चिंटू के माँ बाप को स्कूल बुलाया और उनपर गुस्साई कि क्या सिखा रहे हैं आप लोग अपने बच्चे को ? आप जानते भी हैं वह कैसी हरकतें करता है ?

अपनी परवरिश पर दोनों को बहुत यकीं था, चिंटू में था भी नहीं कोई ऐब . वह तो वही बोलता - करता था जैसा वह घर पर देखता था और उसके माँ बाप ने घर का माहौल स्वच्छ और शांत बना कर रखा था इसके बाद भी प्रिंसिपल की नाराजगी ? आखिर हुआ क्या  था ?

स्कूल २ बजे खतम होता था और स्कूल के पास ही ढाई बजे से चिंटू की कोचिंग शुरू होती थी, रमेश चौधरी और सीमा जी को मिस डिसूज़ा ने २ बजे अपने घर बुलाया, दोनों बहुत परेशां की आखिर चिंटू ने किया क्या है और मिस ने स्कूल में कुछ न बताकर घर बुलाया . ठीक २ बजे चिंताग्रस्त माँ बाप मिस डिसूज़ा के घर पहुंचे लेकिन मिस स्कूल से दस मिनट लेट आयीं और सॉरी बोलकर दोनों को छत पर लेकर गयी, जहाँ से चिंटू की कोचिंग साफ साफ दिखाई देती थी, मिस डिसूज़ा के घर के ठीक ३ घर बाद वह कोचिंग थी. कुछ मिनट बाद चिंटू अपनी दोस्त के साथ छत पर आया और उसकी हरकतों को जब मिस के साथ उसके माँ बाप ने देखा तो शर्मशार हो गए. डूब मरने के लिए चुल्लू भर पानी भी बहुत था उनके लिए.

उस वक़्त चिंटू अपनी क्लासमेट पूर्वी के साथ छत पर आया और दोनों छत के एक छायादार कोने में बैठ गए, धीरे - धीरे नजदीकियां शुरू हुई . पहले हाथ पकड़ा फिर किस किया .... चेहरे, होंठ , गर्दन .... फिर आगे वह सब जो एक पति पत्नी के बीच सम्बन्ध बनते हैं, यानी शारीरिक सम्बन्ध बनाने की पुरजोर कोशिश . पीछे से कोचिंग टीचर ने छुपकर आवाज़ दी सोनल..... यह आवाज़ मिस डिसूज़ा के इशारे पर दी गयी थी . क्युकिं मिस डिसूज़ा ने यह बात सोनल - पूर्वी की कोचिंग टीचर को बता दी थी ये कोचिंग टीचर उसी स्कूल की थीं जहाँ दोनों पढ़ते थे.

आवाज़ सुनकर सोनल पूर्वी घबरा गए और तुरंत अपने कपडे पहनकर नीचे चले गए, ऐसा नहीं था कि सिर्फ सोनल ही ये बातें सीखा था, पूर्वी भी कहीं ना कहीं रात के अँधेरे में होने वाली घटनाओ को देख रही थी इसलिए वह सोनल के साथ बिलकुल सहज थी . मिस डिसूज़ा ने पूर्वी के माँ - बाप को नहीं बुलाया था क्युकिं वह जानती थीं कि यदि पूर्वी के माँ बाप आये तो वह ये कभी नहीं मानेगे कि दोनों बच्चे इसमें बराबरी के हक़दार हैं, दोनों जिम्मेदार हैं , वह सोनल को दोषी ठहराएंगे और कोई कड़ी कार्यवाही भी कर सकते हैं . मिस डिसूज़ा नहीं चाहती थी कि सोनल और पूर्वी के माँ - बाप आमने सामने आएं क्युकिं इस स्थिति में दोषारोपण पहले होगा और समस्या वहीँ के वहीँ रहेगी . इसलिए कोचिंग टीचर की छत पर मिस डिसूज़ा ने कैमरा लगवा दिया और वीडियो रिकॉर्ड हो गयी जिसे दूसरे दिन पूर्वी के माँ बाप को दिखानी थी.

रमेश और सीमा जी ने जब यह सब अपनी आँखों से देखा तो पैरों तले ज़मीं खिसक गयी कि उनके दिमाग में यह कैसे नहीं आया कि उनके रात के सम्बन्ध उनके बच्चे से नहीं छुप सकते , खासतौर पर जब बच्चे माँ बाप के साथ एक ही कमरे में रहते हो . कभी न कभी रात को बच्चे की आँख खुल ही जाती है और सोनल - पूर्वी की हरकते साफ़ इशारा कर रही थी कि एक -दो बार ही नहीं कई बार उन्होंने अपने माँ बाप को ऐसे देखा था , तभी उन्हें शुरुआत से लेकर आखिर तक सब याद था . उन्हें ये पता था कि ऐसा ऐसा होता है, लेकिन दोनों इस बात से अंजान कि यह सब है क्या ? क्यों है ?

शर्मिंदगी का चोला ओढ़ कर रमेश - सीमा जी घर पहुंचे, लेकिन जाने से पहले मिस डिसूज़ा ने दोनों को हिदायत दी कि बच्चे से कुछ बोलना या उसे मारना कोई विकल्प नहीं है उसे सुधारने का . उसके लिए एक छोटा सा कमरा तैयार करवाइये जहाँ उसकी पसंद की सारी चीजे हो , मोबाइल - लेपटॉप से दूर रखिये . जिंदगी जीने के सही तरीके और मायने समझाइये . बच्चा शुरुआत में परेशां जरूर करेगा अलग सोने के लिए खासतौर पर जब , वह रात में सारी चीजे होते हुए देखता है . उसे उसके कमरे में सुलाइये फिर अपने कमरे में आइये . जरुरत है तो बच्चे के बिस्तर के पास एक घंटी लगा दीजिये जो आपके कमरे में बजे, इससे फायदा ये होगा यदि वह जागेगा या डरेगा तो तुरंत आपको बता देगा घंटी बजाकर.

दूसरे दिन पूर्वी के माँ बाप को स्कूल बुलाया गया , लेकिन वह इस बात पर यकीं करने को तैयार नहीं हुए कि पूर्वी भी इसमें बराबरी की जिम्मेदार थी . पहले से ही यह शंका थी मिस डिसूज़ा को इसीलिए अलग अलग दिन दोनों के माँ बाप को बुलाया उन्होंने . उन्हें वीडियो दिखाया गया, मिस डिसूज़ा और कोचिंग टीचर के समझाने और शख्त रवैया अपनाने के बाद पूर्वी के माँ बाप समझे . उन्हें भी मिस डिसूज़ा ने वही समझाया जो रमेश - सीमा जी को समझाया था.

साथ ही मिस डिसूज़ा ने एक दिन बाद ही सारे टीचर, डायरेक्टर से बात कर लड़के लड़कियों के अलग अलग सेक्शन बना दिए अब एक क्लास में लड़के और दूसरी क्लास में लड़कियां पड़ेगी. दूसरी ओर सच जानकर तनाव में डूबे दोनों के माँ बाप ने घर पर एक एक अलग कमरों की व्यवस्था कर दी ताकि आगे से बच्चे वह न देखें जो उनके लिए नहीं है !


लेखिका- जयति जैन 



Note - यह कहानी लेखिका की अनुमति से डाली गयी है ।इस पर लेखिका का पूर्ण अधिकार है।

कहानी चोरी करने और शीर्षक को अपना बनाने के जुर्म में होने वाली कार्यवाही के आप स्वयं जिम्मेदार होगें।

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