मेन्स डे स्पेशल : पंजे का निशान।



राज बहुत दिनों से लघुकथा लिखने की कोशिश कर रहा था पर कथा-तत्व मिल नहीं पा रहा था। 'तुझे कोई कथा-तत्व मिली' सुनील ने राज को चित्रगुप्त पूजा का प्रसाद देते हुए पूछा। राज ने हंसते हुए कहा कि मिल जाएगी यार और चाय नाश्ते के लिए पत्नी को पुकारा। अमृता एक स्वछंद ख्यालात की महिला थी और अभी तक मायके के असर से प्रभावित भी। 

कुछ देर बाद राज ने पुनः आवाज लगाई पर अमृता फोन पर अपनी मां के साथ व्यस्त थी। राज कमरे में गया और फिर.. जोर से थप्पड़ की गूंज से सुनील चौंक उठा। असमंजस में था कि थोड़ी देर बाद राज ने आकर कहा 'भाई चाय पत्ती खत्म हो गई है, ले पानी पी और हां एक दिन पत्नियों के हाथों प्रताड़ित पतियों पर एक लघुकथा जरूर लिखूंगा हा.. हा.. हा..।' जाते वक्त सुनील को राज के गाल पर पंजे के निशान के रूप में एक कथा-तत्व मिल चुका था।



By - संजय कुमार'संज'

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