जस्टिस लोया की मौत और कुछ सवाल।




अपने देश की एक विशेषता यह है कि यहां सत्ता से निकटता होने के साथ ही बड़े-बड़े पापियों के पाप धुल जाते हैं और वे समाज के सबसे सम्मानित नागरिकों में शामिल हो जाते हैं। ऐसा ही कुछ घटित हो रहा है हमारे समाज के एक सम्मानित नागरिक अमित शाह जी के साथ। 

एक वक्त अमित शाह जी विभिन्न आपराधिक गतिविधियों में संलिप्तता के कारण गुजरात से तड़ीपार भी किए जा चुके थे पर जैसे जैसे वे सत्ता में ऊपर उठते गए। उन्हें हमारे माननीय न्यायालयों से क्लीनचिट मिलता गया। उनके चरित्र की निर्मलता प्रमाणित होती गई । अभी हाल ही मे उन्हें सोहराबुद्दीन हत्या प्रकरण में उन्हें बाइज्जत रिहा किया गया है । इस मुकदमे में पहले जज जिन्होंने अमित शाह को चार बार उपस्थित होने के लिए सम्मन जारी किया था उनका तबादला कर दिया गया।

इसके बाद  दूसरे जज जस्टिस लोया़ा इस केस के लिये आते हैं बहुत जल्द ही सुनवाई करके अमित शाह को व्यक्तिगत तौर पर उपस्थित होने का नोटिस भेजते हैं लेकिन नागपुर में एक शादी में उन्हें निमंत्रण मिलता है। वह इसमे शामिल होने के विषय में पशोपेश में थे लेकिन साथी जजों के बार बार कहने पर राजी हो गए और एक गेस्ट हाउस में राज्य के तमाम आला अधिकारियों के साथ रुकते हैं। साथी जजों के अनुसार उन्हें रात में हार्ट अटैक आता है और उन्हें ऑटो से एक निजी अस्पताल ले जाया जाता है। जिसमें ईसीजी नहीं काम कर रहा होता और आगे दूसरे अस्पताल ले जाया जाता है यहां पर उन्हें मृत घोषित कर दिया जाता है। 

आगे जस्टिस लोया परिवार को उनकी मौत की खबर भी नहीं दी जाती और ना ही पोस्टमार्टम के लिए पूछा जाता है पोस्टमार्टम भी परिवार को जानकारी दिये बगैर करा दिया जाता है।  उनके शव को उनकी पत्नी, बेटी के पास न भेजकर दूर उनके पिता के पास भेजा जाता है। वह भी एक साधारण गाड़ी में ड्राइवर के साथ उनके पीछे 2 जूनियर जाते हैं और गांव पहुंचने पर परिवार को साथी जज मीडिया से भी बात नहीं करने देते । आगे जस्टिस लोया का बेटा तत्कालीन मुंबई हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश को स्वत: संज्ञान लेने के लिए पत्र भी लिखते है लेकिन सुप्रीम कोर्ट समेत मुंबई हाई कोर्ट कोई संज्ञान नहीं लेता। 

इस मामले में तीसरे जज आते हैं और वे अमित शाह को क्लीन चिट देते हुए सीबीआई को फटकार भी लगाते हैं और सीबीआई आगे इस फैसले के खिलाफ कोई अपील भी नहीं करती!!


लेखक - अंकेश मद्देशिया
(जब तक जिज्ञासा है तब तक लिखना हैं।)


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