टेस्ट क्रिकेट का रिवाइटल है एशेज सीरीज़!

By - सूरज मौर्या



फटाफट खेल के ज़माने में आज क्रिकेट के शास्त्रीय स्वरूप टेस्ट क्रिकेट को देखने की किसे फुर्सत है। अलबत्ता अब तो लोग एकदिवसीय क्रिकेट को भी देखना कम ही पसंद करते है। उन्हें  तो बस अब क्रिकेट का स्वैग टी-20 मैचों में ही दिखता है।





मगर ऐसे समय में भी टेस्ट क्रिकेट की एक द्विपक्षीय सीरीज़ है जो दर्शकों के पोर-पोर में रोमांच भर देती है। इस टेस्ट सीरीज़ में दर्शक दीर्घा ख़ाली होकर इक्का-दुक्का दर्शकों की बाट नहीं जोहती बल्कि इसे देखने के लिए टिकटों की मारामारी मचती है। पांचों मैच के दौरान दर्शक टीवी स्क्रीन से ओझल नहीं होते। सीरीज़ का परिणाम देख के ही उनकी आत्मा मैचों के नशे से उनींदी होती है।

 इंग्लैंड कप्तान इवो ब्लाइ के नेतृत्व में इग्लैंड की टीम ऑस्ट्रेलिया के दौरे पर गयी। दौरे पर जाने से पहले कप्तान इवो ब्लाइ ने कहा कि वो राख को वापस लाएँगे। उन्होंने ऐसा किया भी; ऑस्ट्रेलिया को 2-1 से सीरीज़ में शिकस्त दे के।



ये सीरीज़ है इंग्लैंड और ऑस्ट्रेलिया के बीच होने वाली एशेज सीरीज़ जो 1882 से हर चार वर्षों के अंतराल पे कम से कम एक बार जरूर आयोजित की जाती है। इस सीरीज़ की शुरूआत 1882 में हुई थी। 

दरअसल 1882 में इंग्लैण्ड के दौरे पर एकमात्र टेस्ट की सीरीज़ खेलने वास्ते ऑस्ट्रेलिया आयी। ऑस्ट्रेलिया ने पहली पारी में मात्र 63 रन बनाए और इंग्लैण्ड ने अपनी पारी में 101 रन बनाए। इस तरह इंग्लैंड ने 38 रनों की बढ़त बना ली। दूसरी पारी में भी ऑस्ट्रेलिया मात्र 122 रन बना सका और इस तरह इंग्लैंड को जीत के लिए मात्र 85 रन की दरकार थी। मगर ऑस्ट्रेलिया के शानदार गेंदबाज़ फ्रेड स्पॉपोर्थ के आगे इंग्लिश बल्लेबाज ताश के पत्तों की तरह ढह गए और ऑस्ट्रेलिया 7 रन से ये मैच जीत गया।

जिसका सूर्य कभी नहीं अस्त होता था, ऐसे इंग्लैंड की एक उपनिवेश के हाथों हुई हार को न ही इंग्लैंड की जनता और न ही इंग्लिश मीडिया पचा पा रहा था।  तत्कालीन समय के लोकप्रिय इंग्लिश अख़बार स्पोर्ट्स टाइम्स ने इस घटना पे एक आर्टिकल भी छापा था जिसका मज़मून कुछ यूँ था कि 29 अगस्त 1882 को ओवल के मैदान पर हुए मैच में इंग्लिश क्रिकेट की मौत हो गयी है। बड़ी संख्या में मित्र और जानने वाले इस घटना से शोक में है। अंतिम संस्कार के बाद राख ऑस्ट्रेलिया ले जाई जायेगी। 


इसके बाद इंग्लैंड की टीम ऑस्ट्रेलिया के दौरे पर कप्तान इवो ब्लाइ के नेतृत्व में खेलने गयी। दौरे पर जाने से पूर्व कप्तान ब्लाइ ने कहा कि वो राख वापस लाएँगे। उन्होंने ये कर के भी दिखाया; ऑस्ट्रेलियाई टीम को 2-1 से सीरीज़ में शिकस्त दे के। इसके बाद मेलबर्न में महिलाओं के समूह ने कप्तान ब्लाइ को तीसरे मैच में इस्तेमाल की गयी गिल्ली की राख से भरी एक कलशनुमा ट्रॉफी भेंट कीं। 

छः इंच की ये ट्रॉफी लॉर्ड्स के म्यूजियम में रख दी गयी। बाद में इससे मिलती-जुलती क्रिस्टल की ट्रॉफी बनायी गयी, जिसे वर्तमान एशेज विजेता टीम अपने पास रखती और सीरीज़ ड्रा पर छूटती है तो पूर्व में विजेता टीम अपने पास ट्राफी रखती है।














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