क्या आपको पता है हमारे लोकसभा सांसदों के पास आधार कार्ड है भी या नहीं।



आधार जानते है आप। अरे जानते कैसे नहीं होंगे। इतनी ब्रांडिंग जो हो गई है। और ब्रांडिंग अभी तक इस क़दर हो रहीं है कि अगर आप किसी को कॉल करें तो भी टेलीकॉम कंपनी आपको आपका आधार कार्ड अपने नंबर से लिंक करने के लिए कहता है। इसके अलावा बैंक से रोजाना दिनभर में एक दो बार आधार से सम्बंधित मैसेज या फिर कॉल आ ही जाता है। इतना ही नहीं टेलीकॉम कंपनी वाले तो ब्रांडिंग के तौर पर प्यारी सी भाषा में आधार नंबर से न लिंक करवाने पर नंबर बंद होने तक कि भी धमकी दे ही जाते है। इन सभी बातों से आज आप सभी रूबरू होंगे।

मुद्दे की बात बताते है जिस आधार कार्ड को वर्तमान सरकार आज इतना तवज्जों दे रही है वही सरकार जब विरोधी खेमे में थी तब खून पी - पी का आधार की आलोचना कर रही थी।

साल 2014 में देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बने। इन्होंने आधार कार्ड को न सिर्फ जरूरी बताया बल्कि इसे आम नागरिक का आधार बता दिया। लेकिन क्या हमारे देश में पल रहे नेता आम आदमी है या नहीं है या फिर आम जनता ये मान ले कि वो सिर्फ माइक पर जनता के सामने जन नेता बनते है बाकी वो तो VIP है।

जब से आधार कार्ड बनना शुरू हुआ है तब से लेकर देश के हर एक नागरिक का रिकॉर्ड सरकार के पास है कि अब तक इतने सालों में किन किन लोगों ने आधार कार्ड बनवाया है। 

लेकिन क्या आप जानते है कि  लोकसभा सांसदों के पास आधार कार्ड है या नहीं ?

इसका जवाब हम आपको देते है अभी हाल ही में... 



अधिवक्ता आरिफ मोहम्‍मद यासीन ज्‍वादर ने लोकसभा सचिवालय के केंद्रीय जन सूचना अधिकारी से 14 दिसंबर को आरटीआइ कानून 2005 की धारा 6(1) और 7(1) के तहत पूछा था कि सदन के सदस्‍यों द्वारा आधार में पंजीकरण का विवरण उन्‍हें दिया जाए।



आठ दिन बाद 22.12.2017 को उन्‍हें उपसचिव और सीएपीआइओ के. सोना की ओर से आधिकारिक जवाब मिला कि उनके द्वारा मांगी गई सूचना सचिवालय के पास मौजूद नहीं है और यह जवाब सीपीआइओ की मंजूरी से उन्‍हें दिया जा रहा है।



सरकार शायद इस बात को छुपाना चाहती है कि उसके सांसदों में से कई ने खुद ही आधार नहीं बनवाया। इसीलिए सूचना के अधिकार के तहत किए गए एक आवेदन के जवाब में सरकार का कहना है कि सरकार ऐसी कोई जानकारी का रखरखाव नहीं करती है।





By- सूरज मौर्या


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