हिंदुओं के लिए।



हिंदुओं के लिए,

मैं स्तब्ध हूँ. आहत हूँ. दुखी हूं. हद तक शर्मिंदा हूँ, अपनी देश,जाति और धर्म सहित सारी पहचानों पर. मनुष्य के बाद लाद दी गई किसी भी पहचान पर मुझे गर्व नही है, बल्कि आज उनमे से कुछ पहचानों को ले कर अन्तस् तक मायूस और छला हुआ महसूस कर रहा हूँ.

राजस्थान में एक कथित लव जिहाद के विरोधी ने क्रूर हत्या का एक लाइव वीडियो बनाया है. मैंने वह वीडियो देखने की कोशिश की पर देख नही पाया. कलेजा बैठ गया,  लगा कि वह गड़ासा उस आदमी पर नही मनुष्यता के वजूद पर चलाया गया है. जिस धर्म से मैं आता हूँ उसी धर्म का आदमी धर्म और संस्क्रति के ही नाम पर जान की भीख मांगते हुए आदमी की भयावह हत्या कर दे, तो थोड़ी सी शर्मिंदगी धर्म के साथ - साथ उस धर्म को मानने वालों को भी होनी चाहिए. यह पहचान आज मेरे दुख देने वाली बात है.

मुबारक हो! यह मुबारकबाद उन शक्तियों को जिन्होंने हिन्दू राष्ट्र के खतरनाक विचार की सटीक प्रोसेसिंग करनी शुरू कर दी है. उन्हें लाइव हत्या करने वाले योद्धा ( जाहिल) अब इंटरनेट पर इस तरह के वीडियो डालते हुए मिल सकते हैं. अब उन्हें खोजने के लिए अतिरिक्त मेहनत की जरूरत नही है. यह सहूलियत हो भी क्यों न, पिछले तमाम दशकों से ऐसे ही जाहिल पैदा करने की सुनुयोजित कोशिश तो की ही जा रही थी. इस वक्र कोशिश ने गणेश शंकर विद्यार्थी औऱ गांधी जैसों को लील लिया, तो आम आदमी की क्या बिसात है.

सोचता हूँ, हमारे देश के किसी उस मुसलमान युवा ने जब यह वीडियो देखा होगा जो किसी हिन्दू लड़की की बेपनाह मोहब्बत में है, तो दोनों पर क्या गुजरी होगी. लड़की ने कहा होगा, 'में तुम्हे प्यार तो करती हूं सलमान ! पर तुम्हे खोना नही चाहती. यह देश अब प्यार के लिए मुकम्मल जगह नही है. ' लड़का भीतर तक अपने मुसलमान होने को ले कर सिहर गया होगा. दोनो ने बैठकर अपने अपने धर्म को कोसा होगा. जिस देश मे मोहब्बत करने पर मौत दे दी जाए वहां गर्व करने जैसा क्या ही हो सकता है.

कल विनीत जी के लाइव से एक बात पता चली कि भारत  बाबरी विध्वन्ध जैसी साम्प्रदायिक सौहार्द बिगाड़ देने वाली दुर्घटना के बावजूद दो कौमों के बीच रिश्तों के बांड बनाता और उन्हें सम्हाल कर निरन्तरता देने वाला देश है. बांड बनाने की यह कोशिशें ऐसे वीडिओज़ से क्या अनुत्तीर्ण होने के डर से डर नही जाती होगी. उन साझा कोशिशों का क्या होगा, जिन्होंने साथ मिल कर यह मुल्क बनाया है.

हम 90 के बाद की पैदाइश के लोग हैं. हम में इतनी नफरत औऱ गुस्सा क्यों है. क्या कथित लव जिहाद ही देश की बड़ी समस्या बची है. यह हौसला कहां से आ रहा है जो धर्म के नाम पर किसी की हत्या करने के बाद भी शर्मिंदा नही है.? मुझे नही पता. 

इतना पता है कि मुझे अब मनुष्य के अलावा सारी पहचाने संदिग्ध लग रही है. 


लेखक - आशुतोष तिवारी 

Comments