विश्व हिंदी दिवस पर " हिंदी मेरा स्वैग है।"


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सीमांत कश्यप बड़ा होकर हीरो बनना चाहता था.पर पत्रकारिता कर ली और पत्रकार बन गया और बैंड बजाने लगा सबकी क्यूंकी संगीत में भी इंटरेस्टेड था. लेकिन दादी और नानी की कहानियों में सत्संग का लगाव था. जाे की वाे कहानी कविताओं में खोने लगा और अब अपनी जवानी के मोती को कहानी के धागों में पिरो रहा है!


"हिंदी दिवस".......जी नहीं। "विश्व हिंदी दिवस" अब कुछ लोगो को तो पता भी नहीं होगा की आज विश्व हिंदी दिवस है,वैसे ही जैसे कुछ लोगो को ये तक पता नहीं "हिंदी दिवस" कब पड़ता है। जानकारी के लिए बताना चाहूंगा "हिंदी दिवस" 14 सितम्बर को मनाया जाता है और "विश्व हिंदी दिवस" 10 जनवरी 1975 से आयोजित किया जा रहा है सबसे पहले नागपुर में मनाया गया था और भारत के पूर्व प्रधानमन्त्री मनमोहन सिंह ने 10 जनवरी 2006 को प्रति वर्ष विश्व हिन्दी दिवस के रूप मनाये जाने की घोषणा की थी। उसके बाद से भारतीय विदेश मंत्रालय ने विदेश में 10 जनवरी 2006 को पहली बार विश्व हिन्दी दिवस मनाया था।



देश की राष्ट्र भाषा "हिंदी" नहीं


हिंदी दिवस अपनी समग्रता में खुसरो ,जायसी का खुमार है .तुलसी का लोकमंगल है सूर का वात्सल्य और मीरा का प्यार है .हिंदी दिवस कबीर का सन्देश है बिहारी का चमत्कार है घनानंद की पीर है पंत की प्रकृति सुषमा और महादेवी की आँखों का नीर है ये सब है पर "हिंदी भाषा" आज भी हमारे देश की राष्ट्र भाषा नहीं है वैसे क्यों नहीं हैं ये जानना हो तो गूगल करियेगा लेकिन ये तो सच है की हिंदी का गाला घोटने वाले हम ही तो हैं जो बड़े गर्व से सीना चौड़ा करके कहते है की "हिंदी है हम" हम कितने हिंदी है और कितने अंग्रेजियत से भरे है ये तो पता चल ही जाता है।


हिंदी हेय दृष्टि का शिकार क्यों ?



हमारी सुबह की शुरुआत good morning और पूरी दिनचर्या का अंत good night से होता है क्यों क्यूंकि मैसेज पढ़ने वाला हमको अनपढ़ समझने लगेगा,भारत में आधे से ज्यादा परिवारों के बच्चे अंग्रेजी माध्यम में पढ़ते है क्यों क्यूंकि अगर वो अंग्रेजी माध्यम ने नहीं पढ़ेंगे तो गधे हो जायेंगे हाँ भाई "गधा" लेकिन उन्ही बच्चो को खड़ा करके २ से १० तक पहाड़ा हिंदी में पूछ लो तो सर से पाँव तक पसीना टपकने लगेगा,अंग्रेजी लोगो में स्वैग बन गया है। लेकिन गौर करे तो हम अब न हिंदी बोलते है न इंग्लिश बोलते हैं बोलते हैं तो केवल "हिंगलिश" स्लोगन तो ये होना चाहिए "हिंगलिश है हम" बड़े बड़े संस्थानों में युवा इंग्लिश न आने  की वजह से कई बार कट जाते है क्यों क्यूंकि उनमे क्लास(स्टाइल) नहीं होता फिर चाहे वो कितनी भी क्लास(कक्षा) पढ़े हो कई बार हे दृष्टि का शिकार होना पड़ता है हिंदी को क्यों ?



आगे बढिये इंग्लिश को उसके दायरे तक रखिये हिंदी को अपना स्वैग बनाइये तब तो कहने में आनंद आएगा की "हिंदी हैं हम"







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