ये किस्सा आपको बतायेगा की भारतीय राजनीति का ग्रैंडमास्टर कौन है ?




क़िस्सा अग्रिम पंक्ति की कुर्सी का!

जब न्यूज़ चैनल से लेकर समाचार पोर्टल, अख़बार और एक आम इंसान दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र के पावन पर्व गणतंत्र दिवस पे पूर्व दिशा से शिरक़त करने आये दस पड़ोसी नेताओ की खबरें बना रहा था। तब एक इंसान गहरे विषाद में डूबा हुआ था। जिसकी कोई सुध बुध नही ले रहा था।

बात अगर खिलौने की होती या किंडल जॉय की होती या एकाध संसदीय क्षेत्र की होती या फिर राज्यसभा सीट की तो उसकी मम्मी तुरंत उसे गिफ़्ट कर देती। मगर यहां तो मसला था द ग्रेट मोदी के चाचा चौधरी वाले दिमाग से निपटने का। जैसे बचपन में हम टेकेन थ्री खेलने जाते थे और जेब मे अगर पचास पैसे या एक का सिक्का हो तो हमें आग उगलने वाला गॉन नही मिलता था और जब सामने से कोई पैसे वाले बंदा आ जाता था तो वो गॉन लेकर ऐसा अगियाबैताल तांडव करता था कि फ़िर दूसरे पक्ष से कोई न टिकता था।

भारतीय राजनीति में राहुल गांधी की हालत उसी गरीब प्रतिद्वंदी जैसी है और मोदी जी आज की तारीख में राजनीति के गॉन है। कब कौन सा दांव खेलना है और कब विपक्षी को धोबी पछाड़ से चित करना है या फ़िर कब उसकी बेइज्जती करके उसे सार्वजनिक होने देना है, सब मैनेज कर लेता है राजनीति का ये ग्रैंडमास्टर।

अब गणतंत्र दिवस के मौके पर होने वाले राष्ट्रीय समारोह में राहुल गांधी को जानबूझकर छठी पंक्ति में बिठाया गया। अब बचपन से लेकर अभी तक अग्रिम पंक्ति में बैठने वाले राहुल गांधी का इस बात पे चिटकना नैसर्गिक ही है। बड़े नेता है, बाहर से पढ़के आये है, अघोषित रजवाड़े खानदान से है तो ख़ुद तो दुखड़ा सार्वजनिक करेंगे नही, इसके लिए भी उन्होंने चेले-चुपाड़े पाल रखे है, जो प्रेस कांफ्रेंस गुहार करते है।

भारतीय कूटनीति विश्लेषकों ने ही कहो ये सुझाया हो कि राहुल जी को पिछली पंक्ति में बिठाओ वर्ना लोग मतिभ्रम के शिकार हो जाएंगे कि झांकी कहाँ से शुरू हुई है? हो सकता है कि विभिन्न राज्यों से आई हुई झांकी मंडलियों ने ये गुज़ारिश की होगी ताकि लोग राहुल जी को न देख के उनकी झांकियों का लुत्फ़ ले और गौरान्वित हो।

ख़ैर! अग्रिम पंक्ति गणमान्य लोगों के लिए आरक्षित होती है। गणमान्य लोगों में शासन-प्रशासन के लोग या फ़िर कला-संस्कृति, अर्थ, साहित्य और खेल जगत के लोग आते है। अब चूंकि राहुल जी के पास नेता विपक्ष का भी पद नही है , गोया कि उनकी पार्टी को नेता विपक्ष के लायक भी सीटें नही मिली, फ़िर भी मल्लिकार्जुन खड़गे विपक्ष के नेता है। अब राहुल जी को गांधी भर की योग्यता या फ़िर भूतपूर्व होने जा रही राष्ट्रीय पार्टी के अध्यक्ष होने की योग्यता के आधार पर अग्रिम पंक्ति की सीट आवंटित की जा सकती थी, मगर इतनी योग्यता क्या उनको गणमान्य बनाने के लिए काफ़ी है ?



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