जब माेहम्मद अली ने पत्रकाराें से मनमाेहन सिंह के पैर का नाप पूछा।

By - सीमांत कश्यप
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सरदार मनमोहन सिंह के प्रधानमंत्री बन जाने की खुशी में उनके पैतृक गांव वालों ने बड़ी खुशी मनाई, और उनकी याद में उन्हीं के नाम पर गांव में सार्वजनिक लाइब्रेरी बनाई। गांव के बुजुर्ग लोग सरदार मनमोहन सिंह के हाथों ही उस लाइब्रेरी का उद्घाटन करवाना चाहते थे। उनके चौथी जमात के एक साथी 'मुहम्मद अली' ने किसी तरह से पत्रकारों से सरदार मनमोहन सिंह के पैर का साइज पूछकर नई 'कसूरी' जूतियां खरीदकर रखी थीं, कि उनका यार जब गांव में आएगा, तो पहले तो उससे गलबहियां करके बड़ी जोर से रोएगा, फिर जाते वक़्त उनको ये जूतियां भेंट करेगा। जिला कसूर की जूतियां वर्ल्ड फेमस हैं।

सरदार मनमोहन सिंह इन हिंदुत्ववादियों के शोर- शराबे से इतना डर गए थे कि कोई उनको पाकिस्तानी या पाकिस्तान परस्त ना कह दे। इसलिए दस सालों के अपने पीएम काल में वे कभी भी पाकिस्तान नहीं गए। वहीं हमारे देश में हिंदुत्ववादियों ने हमारे वर्तमान प्रधानमंत्री को खुली छूट दे रखी है कि वे जो मर्जी करें, उनको पाकिस्तान परस्त नहीं कहने दिया जाएगा। भले ही वे बिना कोई प्रोग्राम के ही पाकिस्तान में हवा से कूद पड़े, पर कोई बात नहीं, कोई सवाल नहीं। नवाज़ शरीफ़ को अपने शपथ समारोह में बुलाकर दरियां बिछाएं, कोई बात नहीं, कोई सवाल नहीं।

पाकिस्तान में कभी टटपुंजिए से खाल-विक्रेता रहे हाफ़िज़ सईद की तो उसकी अपनी जात- बिरादरी वाले गुज्जर लोग कभी नहीं पूछते थे, पर उसको भारतीय मीडिया और हिंदुत्व वादी मंडली ने यहाँ ख़बरें चला चलाकर ऐसा उसका प्रचार किया, कि वह अब बहुत बड़ा ग्रुप चला रहा है, बड़ी फॉलोवर बनी हुई है उसकी। और, यही हाफ़िज़ सईद हमेशा ऐसे काम करता है, या बयान देता है, जिससे हमारे यहाँ की हिंदुत्ववादी मंडली को अपना नफ़रत का कारोबार चलाने में मदद मिले।

ख़ैर, मुहम्मद अली ने बहुत सालों तक वो जूतियां संभाल कर रखी। बड़ी उम्मीद थी उसको, कि मोहणा (मनमोहन सिंंह) कभी न कभी तो अपनी पैदाईश के गांव में आएगा। मुहम्मद अली की हैल्थ कोई ज्यादा ठीक नहीं थी, वो और ज्यादा इंतज़ार नहीं कर सकता था, इसलिए उसने वो जूतियां अटारी-वाघा बॉर्डर पार करनेवाले किसी शख्स को दे दी, और कहा कि सुना है जब तुम सरहद पार करोगे, तब सरदार मनमोहन सिंह वहाँ अमृतसर में दरबार साहब में मत्था टेकने आएंगे। तुम बस इतना कहना कि मोहणेआ सोहणेआ, तेरी पैदाईश के गांव 'गाह' से तेरे यार मोहम्मदे ने यह तोहफ़ा भेजा है!

किसी ख़बर में पढ़ा था, कि इस घटना के कुछेक दिन बाद मुहम्मद अली अपने पोते-पोतियों और गांव के दूसरे बच्चों से कहता रहता था, "जाओ ओए, पता करो, हमारे मोहणे ने जूतिआं पहनी कि नहीं ?" फिर वह गांव के बाहर की गली में आकर हरेक राहगीर से पूछता था, कि हमारा मोहणा कब आएगा ??

हमारे अब के माननीय पीएम के बयानों से पता चला कि सरदार मनमोहन सिंह तो भारत के गद्दार है !! एक सूबे का सीएम बनाने के लिए दो बार भारत का पीएम रह चुका शख्स पाकिस्तान से सांठ गांठ करता है !!!

जो इन टूटे फूटे मुल्कों सूबों का पीएम शीएम बनाना है, बना लो, और, देश के गद्दारों को बे- लिहाज और बे- रियायत के जेलों में डालो, मुहम्मद अली तो अब क़ब्र में सो रहा है, आख़िरत से पहले कभी आकर नहीं कहेगा, कि "साड्डा मोहणा अपणे मुल्क दा गद्दार कदी वी नई हो सकदा !

फेसबुक में विचरण के दाैरान बलराज कटारिया जी की वाल से लिया गया !

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