नवजात को जिंदा दफनाना कहाँ तक उचित है ?


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बीते कुछ वक्त से नवजात शिशु को लेकर काफी खबरें आ रही है। किसी ने नवजात का खत्म कर दिया तो किसी ने उसका सौदा कर दिया।  जो ऐसा करते है क्या उनका मन नहीं कांपता ? इस तरह की वारदात को अंजाम देने के बाद क्या वो झल्ला नहीं उठते ? 

ताजी घटना की बात करें तो धानेपुर थाना क्षेत्र के नरसिंह डीह बैरागी जोत गांव के बाहर गन्ने के एक खेत में किसी ने एक नवजात बच्ची को जिंदा दफना दिया। किसी को पता न चले इसके लिए मिट्टी के ऊपर पत्ते डाल दिये। शुक्रवार सुबह शौच के लिए गये ग्रामीणों को इसकी जानकारी हुई तो उन्होंने यूपी डायल 100 को खबर की।

तत्काल मौके पर पहुंचे पुलिस वालों ने बच्ची को मिट्टी से निकाल कर सीएचसी में भर्ती कराया। पुलिस ने बताया कि इस संबंध में जानकारी की जा रही है। 

जानकारी के अनुसार इस गांव के लोग शुक्रवार सुबह शौच को गये तो एक बच्चे के रोने की आवाज सुनाई दी। इस पर लोगों के पांव ठिठक गए। इधर-उधर देखने पर आवाज के सहारे उसके पास पहुंचे तो पता चला कि एक नवजात बालिका नाल समेत मिट्टी में दबी पड़ी है। इस बात की जानकारी होने पर आसपास के काफी लोग इकट्ठा हो गए। 

गांव के ही संजय ओझा ने यूपी डायल 100 को सूचना दी। सूचना पाकर फौरन पीआरवी 0876 मौके पर पहुंच गई। एचसीपी उमेश सिंह व सिपाही गोविंद यादव ने तत्परता दिखाते हुए बगैर किसी देरी के नवजात को निकाल कर उसे गर्म कपड़े में लपेट कर सीएचसी मुजेहना में लाकर भर्ती कराया। जहां पर अब उसका उपचार चल रहा है।

 नवजात की देखभाल कर रहीं एएनएम प्रमिला ने बताया कि बच्ची पूरी तरह से स्वस्थ है। डा. विवेक मिश्र ने बताया कि नवजात अब स्वस्थ है।  उसे आईसीयू में रखा गया है। उसका वजन 2 किलो 900 ग्राम है। उसका समुचित उपचार व देखभाल की जा रही है। यूपी डायल 100 के कार्य की क्षेत्र में सराहना हो रही है।

नवजात शिशुओं पर हो रहे इस तरह के अत्याचार को रोखने के किये अपने सुझाव दे कमेंट करे या फिर हमें मेल करें। hindidakiya@gmail.com

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