अपमान के नाम पर हिंसा और आगजनी कर रहे हैं लोग किसी भी समुदाय के प्रतिनिधि नहीं हो सकते।

By - अंकेश मद्देशिया

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लंबे समय से विवादों में चल रही फिल्म 'पद्मावत' 25 जनवरी को रिलीज होने जा रही है। केंद्रीय प्रमाणन बोर्ड द्वारा दिए गए कुछ कट्स के सुझाव और फिल्म का नाम 'पद्मावती' से 'पद्मावत' किए जाने के बाद इसे सिनेमाघरों में दिखाए जाने की अनुमति मिल गई। इसके बाद भी राजस्थान , मध्य प्रदेश और यूपी जैसे राज्यों की सरकारों ने अपने प्रदेश में इस फिल्म के प्रदर्शन पर रोक लगा दी। इन राज्यों में फिल्म के प्रदर्शन को रिलीज कराने के लिए फिल्म के निर्माताओं को उच्चतम न्यायालय जाना पड़ा। 

सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुसार इस फिल्म का प्रदर्शन पूरे देश में होगा। पर राजपूत करणी सेना एवं अन्य उपद्रवी संगठनों की धमकियों के कारण बहुत से सिनेमाघरों में इस फिल्म का प्रदर्शन नहीं हो पा रहा है। 

Credit - सत्याग्रह. कॉम

अहमदाबाद के तीन मॉल्स में करणी सेना के कार्यकर्ताओं ने आग लगा दी। जबकि इन मॉल्स में से एक हिमालयन मॉल के मैनेजर का कहना है कि हमने तीन दिन पहले से ही यह सूचना लगा रखी है कि हम पद्मावत फिल्म नहीं दिखाएंगे फिर भी मॉल में आग लगा दी गई। अहमदाबाद में दो हज़ार उपद्रवियों के सामने पुलिस और प्रशासन के सुरक्षा के सभी दावे खोखले निकले।

फिल्म की रिलीज के एक दिन पूर्व पत्रकारों और फिल्म समीक्षकों को फ़िल्म दिखाई गई। जिसमें से अधिकांश लोगों का कहना है कि यह फिल्म किसी भी तरीके से राजपूत समुदाय की भावना का अपमान नहीं करती बल्कि उनके शौर्य और स्वाभिमान के लिए जान दे देने जैसे गुणों को भव्य ढंग से पेश करती है।

फिर यह कौन लोग हैं जो अपमान के नाम पर जगह-जगह हिंसा और आगजनी कर रहे हैं यह किसी भी समुदाय के प्रतिनिधि नहीं हो सकते।



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