जिंदगी की तल्ख सच्चाइयां - विवेक भटनागर।





पढ़ें सब शौक से ऐसी किताब रख जाऊं
यूं सच की राह में महका गुलाब रख जाऊं।

यह जिस गजल के मतले का शेर है, वह अशोक आलोक के चौथे और आखिरी गजल संग्रह 'अन्यतम गजल' में संग्रहीत है। इसके पहले उनके तीन गजल संग्रह 'आईने के सामने', 'लिबास', 'जमीं से आसमां तक' प्रकाशित हो चुके हैं। चौथे गजल संग्रह 'अन्यतम गजल' का  2017 के अक्टूबर माह में लोकार्पण हुआ और 19 नवंबर 2017 को काल के क्रूर हाथों ने इसके रचनाकार को अपने चाहने वालों से छीन लिया। एक वर्ष पूर्व उन्हें कैंसर होने की जानकारी मिली थी। तब से वे इस बीमारी से लड़ रहे थे और नवंबर 2017 में वे सबको छोड़कर चले गए और सौंप गए अपनी वह किताब, जो सचमुच महका हुआ गुलाब है। इसकी गजलों की सुगंध हिंदी गजल के परिदृश्य को महकाने वाली है और हर पाठक इससे मुअत्तर होना चाहेगा।

इस गजल संग्रह की बहुत सी गजलें जिंदगी जीने की जद्दोजहद को दर्शाती हैं- जिंदगी है आग, पानी लिख रहा हूं/चंद सांसों की कहानी लिख रहा हूं/आंसुओं के भीगते लंबे सफर में/मुस्कुराती है जवानी लिख रहा हूं।

गजलकार व आलोचक ज्ञानप्रकाश विवेक ने इस संग्रह की भूमिका में लिखा है, 'प्रत्येक रचनाकार रचना को रचते हुए अपने आपको भी रचता है। अशोक को यह हुनर हासिल है। वे एक शाइस्ता गजलकार हैं और अपनी बात बड़ी शाइस्तगी से गजलों में व्यक्त करते हैं। वे सांसारिक विडंबनाओं से परिचित हैं, इसके बावजूद उनकी गजल का किरदार जिंदादिल और फाकामस्त है।

अशोक आलोक स्वयं कहते हैं, 'गजल की मौलिकता और कहन की स्थिरता गजल पाठकों के दिल में उतर कर सुख का संचार करती है और सामयिक समस्याओं पर गहनता से सोचने के लिए मजबूर करती है। जीवन के हर मोड़ से रूबरू कराती आज की गजलें जीवन के मुश्किल हालात तथा सुकून के पल से भी अवगत कराती हैं, जिसमें जिंदगी की तल्ख सच्चाइयों से परिचित होते हैं। जीवन की तल्ख सच्चाइयों से भरी इन गजलों का भी हिंदी जगत में स्वागत होगा।

---------------------

पुस्तक : अन्यतम गजल

लेखक : अशोक आलोक

प्रकाशक : मीनाक्षी प्रकाशन, दिल्ली

मूल्य : 150 रुपये





By - विवेक भटनाकर
(वरिष्ठ पत्रकार
)

Comments