धर्म के नाम पर लुटती पिटती अस्मतें।



विभूति नारायण राय का आज लेख पढ़ा कि कैसे प्रयाग के कुम्भ में लड़कियों और बुजुर्ग आरतों को जानबूझ कर उनके घर वाले छोड़ कर चले जाते हैं तो या तो उनका जीवन भीख मांगते कटता है या अस्मत बेचते.

तो उन्होंने ऐसी कौनसी नयी जानकारी दे दी. ब्रांड होने के यही फायदे हैं कुछ भी लिख दो, लपक के छपेंगे.

दुनिया में जितने धर्म हैं उनमें आरतों को लेकर उतने ही दुष्कर्म हैं. किस धर्म में औरत को इंसान का दर्जा दिया गया है विभूति बाबू!!!

रोम के ऑर्थोडॉक्स चर्च से लेकर कर्नाटक, महाराष्ट्र और गुजरात की सीमा के हज़ारों क्षेत्रों के मंदिर अय्याशी का अड्डा रहे हैं. देवताओं के लिए बाकायदा सात्विक वेश्याओं का सृजन किया गया. ग़ज़नवी के हमले के समय सोमनाथ का मंदिर वेश्याओं का अखाड़ा बना हुआ था. सभ्य लोग कहेंगे पापी, वो वेश्याएं नहीं नृत्यांगनाएं थीं, जो देवताओं को अपनी कला से खुश करती थीं.

जिस पीरियड में मुस्लिम आक्रांता हुआ करते हैं. उनका सारे धार्मिक विश्वास आरतों पर ही क़हर बन कर टूटते हैं.

काशी का विश्वनाथ मंदिर तो लड़कियों और आरतों की अस्मत लुटवाने में विश्व विख्यात है और धर्मों के धार्मिक स्थल भी इस पुण्यकर्म में पीछे नहीं.

और सैंकड़ो साल से वृंदावन की गलियों में क्या हो रहा है, उसे देखने के लिए कौनसे सुरमे की ज़रूरत पड़ेगी विधवाओं और घरों से निकाली गई औरतीं का विश्व का सबसे बड़ा नारी निकेतन है तो विभूति बाबू अपनी जानकारी को अपडेट करो भाई पुलिस फ़ाइल से तो रोज कई चैनल एपिसोड दिखा रहे हैं.





By - राजीव मित्तल
( दुनिया की ऐसी तैसी करने आया पत्रकार)




फ़ोटो - मिथलेश.कॉम

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