कविता : लड़के तो ऐसे ही होते है।

￰By - मंजिरी मिश्रा
क्रेडिट - गूगल


लड़के तो ऐसे ही होते है ....
ये वाक्य सबने सुना है ...
या अक्सर ये बोला भी होगा ...
मैं भी अक्सर सोचती हूँ ....
क्या सच ही ...
लड़के तो ऐसे ही होते है ..
ये उनको वाकई ...
  गैर  ज़िम्मेदार  हो जाने का ..
मनमर्ज़ी  का एक सजा  हुआ प्लेटफॉर्म  नहीं दे रहा ..
या खुद को साबित  करते रहना सिर्फ लड़की के फ़र्ज़  में आया है ...
हमने सदियों से एक राग पाल लिया है ...
वो तो ऐसे होते ही है ..
.तुझे सोचना  चाहिए था !!!
हो सकता है ..
.मैं गलत  लगूँ आपको ...
सच है .....
सदियों की परम्पराएं  एक दिन में नहीं बदलती  .
..पर पहल  तो ज़रूरी है ...
मैं तो मानती हूँ ...
.वो भी तो लड़कियों  की तरह ही
संवेदन  शील  होते है ...
समझदार होते है ...
तो बस जिस तरह  समाज
 एक लड़की के सम्मान के लिए भी
उसे ज़िम्मेदार  मानता है ....
लड़के को भी सोच दें ......
कि वो भी महसूस कर सके ..
..कि उसका सम्मान उसके खुद
अपनी सोच की ज़िम्मेदारी है !!!
क्योंकि अगर लड़के हर ओर
ज़िम्मेदार हो सकते है तो यहाँ क्यों नहीं ....
उसके पहले हमें समाज में
ये सोच का प्लेटफार्म बदलना  होगा ...
.कि लड़के तो होते ही ऐसे है ....
सोचियेगा  ये कह कह कर ..
कहीं हम उन्हें यूँ ही होते रहने की 
     छूट तो नहीं दिए जा रहे !!!!






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