क्या श्रीदेवी सिर्फ 54 बरस की थीं ?



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काम खत्म करके रात कोई ढाई बजे घर पहुंचा ही था कि भोपाल से एक साथी का फोन आया श्रीदेवी का निधन हो गया है। एक पल को ठिठक गया। टीवी खोलकर देखा तो आज तक पर स्क्रोल चल रहा था। दुबई में श्रीदेवी का हार्ट अटैक से निधन। शादी में शामिल होने के लिए गई थीं। यह खबर जितनी स्तब्ध करने वाली थी, उतना ही मैं उस लाइन को देखकर भी चौंका। सिर्फ 54 बरस की थीं श्रीदेवी। आंखों के आगे तमाम फिल्में और उससे जुड़ी यादें घूम गई। सोच में पड़ गया कि क्या श्रीदेवी सच में 54 बरस की थीं। 

सबसे पहले याद आई सदमा। कमल हासन के साथ जिंदगी को गले लगाने निकली सुरमई अंखियों वाली एक लडक़ी। जो सदमे के कारण बचपन में जा पहुंची है। बोलती है, उठती है, बैठती है, खिलखिलाती है, किसी नजरिये से श्रीदेवी नहीं लगती। सिर्फ बच्ची और उसकी शरारतें नजर आती हैं। आखिरी रास्ता में पुलिस कमिश्नर की नकचढ़ी लडक़ी को देखकर कोई कह सकता है कि यह सिर्फ अभिनय हो रहा है। हकीकत नहीं है बल्कि कोई फिल्म चल रही है, उसमें एक लडक़ी किरदार निभा रही है। 

वह नो एंट्री में घुसने की कोशिश कर रही है, तभी इंस्पेक्टर पहुंच जाता है और उसकी गाड़ी के पहिये की हवा निकाल देता है। तब तक भी अंदाजा नहीं होता कि दोनों के बीच पहले से कोई लव कैमिस्ट्री है। फिर जब अपहृत कर ली जाती है, उस वक्त खूनी डेविड की कैद में डरी-सहमी सी। डेविड द्वारा आजाद किए जाते वक्त फिर वही अल्हड़पन आंखों से झांक पड़ता है, जब वह कहती है कि मैं घर जाकर खा लूंगी। 

तनु वेड्स मनु में कंगना के डबल रोल की बहुत तारीफ हुई, लेकिन उसके पहले यह करिश्मा सीता और गीता में हेमा मालिनी और चालबाज में श्रीदेवी ने कर दिखाया था। चालबाज में श्री किसी भी एंगल से हेमा जी से कमतर नहीं लगीं। दोनों ही किरदार में उतनी ही फिट और अलग। कहानी में डूबते ही जरा अहसास नहीं होने देतीं कि ये दो नहीं एक ही अदाकार का करिश्मा है। 

मिस्टर इंडिया की जर्नलिस्ट कैसे भूल सकते हैं, जिसे शोर बिल्कुल पसंद नहीं है। बच्चों से भी इसी वजह से चिढ़ती भी है, लेकिन जब उनकी रो में बहती है तो बस उन्हीं की होकर रह जाती है। प्यार मिस्टर इंडिया से करती है, लेकिन अरुण की सादगी को भी नजरअंदाज नहीं कर पाती। लम्हे में प्यार की एक नई कहानी गढऩे की कोशिश करती है। मोरनी की तरह आधी रात को बाग में नाच उठती है, लेकिन अहसास होते ही, हकीकत को स्वीकार करने से परहेज नहीं करती। 

चांदनी में प्यार के दो रूपों के बीच झूलती हुई युवती की दास्तां कैसे मन से निकाली जा सकती है। हाथों में नौ-नौ चूडिय़ां पहनकर सबको नचाती है, लेकिन नियती के हाथों खुद कठपुतली बनती है तो भी हार नहीं मानती। चौखट पर आए दूसरे प्यार को समझने की कोशिश करती है, लेकिन अंतत: फिर अपने प्यार को हासिल कर लेती है। नगीना में कब महसूस होता है कि वह इच्छाधारी नागीन नहीं है। नीली दमकती आंखें लिए वह जब दोनों हाथों से फन फैलाती तो पूरे जिस्म में झुरझुरी मच जाती है। लगता है सच में पैरों में कोई नागीन आकर लिपट गई है। 

अनगिनत किरदार हैं, जो सिर्फ और सिर्फ श्रीदेवी की वजह से जिंदा हैं और उनके जाने के बाद भी जिंदा रहेंगे। अभिनेताओं के साथ कैमेस्ट्री हो या फिर खालिस अभिनय वे हर कसौटी पर हमेशा 21 ही रहीं। जितेंद्र, राजेश खन्ना, अमिताभ बच्चन से लेकर अक्षय कुमार, शाहरुख खान, अनिल कपूर तक के साथ वे उतनी ही सहज, सरल और सटीक रहीं। खुदा गवाह, लम्हे जैसी फिल्मों में खुद ही मां-बेटी का किरदार निभाया, लेकिन आप लाख कोशिश कर लीजिए, मां और बेटी कहीं से एक नजर नहीं आएगी। 

निजी जिंदगी में जब उन्होंने पहले से शादीशुदा और बड़े बच्चों के पिता बोनी कपूर से शादी की तो लगा था कि अब यह अध्याय खत्म हुआ, लेकिन इंग्लिश-विंग्लिश में देखकर लगा, नहीं अभी तो बहुत कुछ आना बाकी है। अंग्रेजी न जानने वाली आम भारतीय महिला का किरदार शायद ही कोई और निभा सकता था। महिला जो दिन-रात पति और बच्चों के लिए लगी हुई है, बावजूद उसके उसे वह सम्मान नहीं मिल पाता, जिसकी वह हकदार है। पति को लगता है कि वह तो लड्डू बनाने के लिए ही पैदा हुई है और बेटी उसके अंग्रेजी न जानने की वजह से हीन महसूस करती है। और वह दृश्य जब इंग्लिश क्लास का एक साथी उसे छत पर प्रपोज करता है। वह अंदर सुलग उठती है, लपटें आंखों से नजर आती है, रोम-रोम झुलसता दिखाई देता है, लेकिन वह संयत रहती है। चुपचाप उतर आती है, मंगलसूत्र देखती है और आगे बढ़ जाती है। 

यह निश्चित तौर पर श्रीदेवी के आगे बढऩे का वक्त नहीं था, लेकिन वे बढ़ चुकी हैं। रात 3 बजे भी उनके घर लोगों के हुजुम का जुटना उनके प्रति लोगों के स्नेह को जाहिर करता है। कोई बड़ी बात नहीं कि अमिताभ ने महसूस किया कि अजीब सी घबराहट हो रही है और उसके कुछ देर बाद ही श्रीदेवी के निधन का समाचार आ गया। आसमान एक दिन तो टूटना ही था, आधी रात को टूट गया। एक सितारा नहीं पूरा नक्षत्र डूब गया है। 

इसलिए वह लाइन चौंकाती है क्या सच में वे 54 बरस की थीं। इतनी कम उम्र में इतना बड़ा जहां कैसे बना लिया। निश्चित तौर पर यह किसी करिश्मे से कम नहीं है। कितनी साधना, कितने अनवरत, अथक और अहर्नीश प्रयासों ने श्री को श्री बनाया था, हम अंदाजा भी नहीं लगा सकते। अलविदा नहीं कहूंगा क्योंकि श्री मरी नहीं हैं, श्री कभी मरा नहीं करती। वे हमेशा हमारे बीच रहेंगी। अपने सतरंगी अभिनय के साथ। यह इंद्रधनुष हमेशा ही अभिनय के आकाश पर दमकता रहेगा।



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