प्रिया वरियर के अचानक से उपजे प्रेमियो।

By - संकर्षण


IBT times indai



प्रिया वरियर के अचानक से उपजे प्रेमियो,

आपको मीम-मीम नमस्कार। हाँ भाई! कल से मीम पे मीम ठेले हो आप फेसबुक से लेकर व्हाट्सअप, ट्विटर के गलियारों में। कोई प्रिया वरियर के बराबर में मोदी की तस्वीर लगाकर ठरकियत का मुजाहिरा कर रहा है तो कोई केजरीवाल के संग नयन-मटक्का करवा के रायता फैला रहा है।

अमूल बेबी पॉलिटिशियन राहुल गांधी को भी नही छोड़े फेसबुक वॉरियर, बेचारे क्यूट से राहुल बाबा के साथ भी प्रिया का मीम बना दिये। राहुल गांधी के क्यूटत्व से की गई इस छेड़छाड़ के खिलाफ़ वो आईसीजे भी जा सकते है। इसके अलावा कुछ लोग जो अभी भी सिंगलत्व की अनमोल धरोहर है, उन्होंने तो अपने को ही प्रिया वरियर के संग कोलॉज में बिठा दिया है।

ऐसे घनघोर सिंगल लौंडे ये भी कह रहा है कि सख्त लौंडा भी पिघल गया। अब क्या प्रिया वरियर की फ़ोटो कोई क्रायोजेनिक स्टेज़ है जो इतना कम तापमान कर देती है वो और तुम एक मिनट में पिघल जाते हो। और हाड़-मांस के बने हो बे कि पत्थर के जो ख़ुद को सख्त बताते थक नही रहे हो।

अबे मोदी जी या किसी और राजनेता के संग उनकी फ़ोटो डालते वक़्त कम से कम उस लड़की की उम्र का तो ख़्याल कर लेते। अठारह बरस की है उ अभी। अब उ बकराती मत करना कि फ़िल्मो में जो काम करेगी तो ट्रोल होगी ही। फिल्मों में काम करने वाले कितने लौंडो की फ़ोटो को ट्रोल करते हो बे? शायद एक्को नही, या कम से कम उनकी फ़ोटो को लेकर तो कतई नहीं।

अच्छा सब अपने-अपने स्कूल के दिनों में इकतरफा प्यार में धोखा खाये ही रहते है तो स्कूल ड्रेस में किसी लड़की को देखकर उ कुंठा निवारक सामग्री भी मिल जाती है। पुरानी खाज को इस फ़ोटो ट्रोल नामक इच गार्ड से मिटाने की कोशिशें शुरू हो जाती है।

'मुझे आज तक प्यार नही हुआ' कहने वाले लौंडो के पास उसके आस-पड़ोस के हर आशिक-माशूक की न सिर्फ कुंडली रहती है बल्कि वो बराबर कुछ न करने की आड़ में जी-तोड़ मेहनत करता है उस लड़की को पटाने की जो अपनी मर्जी से या गलती से अभी सिंगल बची है। सख्त लौंडो की पिट्यूटरी ग्रंथि से भी वही ऑक्सीटोसिन हार्मोन निकलता है जो गैर सख़्त लौंडे निकालते है। अगर फ़िर भी वो कहते है कि प्रेम में नही है तो उन्हें मनोवैज्ञानिक के पास जाना चाहिए जो ये बात देगा कि उनमें कौन से रसायन की कमी है।

प्रेम न करने की आड़ में प्रेम करने वालों या उन प्रतीकों की खिल्ली उड़ाना ठरकत्व का चरम है। एक से प्रेम में होने वाले एक के ही प्रेम में रहने की कोशिश करते है और किसी से प्रेम न करने वाले हर किसी से प्रेम करने की ताक में रहते है। प्रिया वरियर से ध्यान हटाकर अगर कैरियर पे ध्यान लगाओगे तो हो सकता है कि कुछ ढंग को हो ही जाएं और फ़िर वो भी मिल सकती है जिसके लिए 'कहा भी न जाएं और रहा भी न जाएं' टाइप अभी तक अभिनय करते आये हो।

धकियाउ नमस्कार के साथ,
संकर्षण शुक्ला।



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