जो रुक गया वह सहारा, उड़ गया वो मोदी।

By - अमित मंडलोई



एक पुरानी कहावत है कि चोरी के बाद जो सबसे जोर से चोर-चोर चिल्लाए, उसी के अपराधी होने के आसार सर्वाधिक होते हैं। देश में हो रहे धारावाहिक घोटालों ने इस कहावत को पूरी तरह से उलट कर रख दिया है। खासकर मोदी और माल्या ने इस केस स्टडी में नए सूत्र खोजे हैं। ये साफ कहते हैं कि चोरी कर ली है तो रुकिए मत, उड़ जाइये। यानी लालच उतने का ही कीजिए, जितना समेट कर भाग सकें। गठरी भरते ही, उड़ान भर लीजिए। ज्यादा का लालच किया तो गठरी फट भी सकती है और उसे लेकर उड़ पाना मुश्किल भी हो सकता है। 

ज्यादा दूर न भी जाएं तो सहारा श्री सुब्रत राय को ही लीजिए। सेबी के अनुसार उन्होंने भी कोई 23-24 हजार करोड़ रुपए की गड़बड़ी की थी। गड़बड़ी भी ये कि उन्होंने बिना सेबी की इजाजत के पूरी तरह कनवर्टिबल डिबेंचर जारी कर लोगों से रुपए उगाह लिए थे। सहारा का कहना था कि जो जारी किया गया है, वह कोई हाइब्रिड यानी की संकर प्रोडक्ट है और उसके लिए सेबी के बजाय रजिस्ट्रार ऑफ कंपनीज की अनुमति चाहिए होती है, वह उसने ले रखी है। 

सहारा श्री इसी खुशफहमी में थे कि कानून-कानून के खेल में वे कमजोर नहीं पड़ेंगे और मामला सेट कर लेंगे, लेकिन बात बन नहीं पाई। यहां तक कि कोर्ट में उन्होंने 3 करोड़ लोगों की 24 हजार करोड़ एप्लिकेशन भी भेजने की कोशिश की। 127 ट्रक भरकर कागज भेजे, लेकिन उनसे सिर्फ ट्रैफिक का कचूमर निकला, केस में उन्हें कोई राहत नहीं मिली। निवेशकों के 23 हजार करोड़ लौटाने का दावा भी काम नहीं आया और आखिरकार सहारा श्री को दो साल से अधिक समय तिहाड़ जेल में बिताना पड़ा। मां के अंतिम संस्कार के समय वे पे रोल पर बाहर आ पाए। 


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इनके उलट प्रात:स्मरणीय विजय माल्या जी को लीजिए। उन्होंने देश के कोई दर्जन बैंकों से आठ हजार करोड़ रुपए का कर्जा लिया। उसके उत्तेजक कैलेंडर छपवाए, लाल ड्रेस में एयर होस्टेस रखी और वैसी ही लाल और एक्जोटिक विमान सेवा चलाई, दारू बनाई बेची और खुद भी जी भर कर पी। जमकर पार्टियां की, टॉप मॉडल्स और हीरोइनों के साथ बरमुंडे में तफरीह की। धनाढ्यों की एक अलग ही छवि निर्मित की और जब लगा कि बाबा अब हो गया है। पहले  किंगफिशर के मुंह से मछली छिनी, हजारों लोगों को सडक़ पर लाए और फिर कोई दूसरी फ्लाइट पकड़ कर लंदन भाग गए। 

अब आप करते रहिए अपने देश में जो करना है, प्रॉपर्टी सिल, लंदन पुलिस से अपील, रेड कॉर्नर नोटिस, इंटरपोल से संपर्क-वम्पर्क। अपने वीजू भाई को कोई फर्क नहीं पड़ता। आपने लंदन में गिरफ्तार भी कराके देख लिया, लोगों को बाथरूम जाकर आने में जितना समय लगता है, उससे भी कम समय में भाई जमानत लेकर आ गया। अब लंदन में वह भारतीयों को इंटरटेन करता है, क्रिकेट टीम की मेजबानी लेता है और आप चुपके से एनपीए सेटलमेंट के नाम पर बैंकों का पैसा माफ कर देते हैं। विजय माल्या का अध्याय समाप्त हो जाता है। 

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ऐसी ही महापुरुष ललित मोदी भी रहे। आईपीएल से अरबों की मनी लांड्रिंग के आरोप लगे। फ्रेंचाइजी देने में पक्षपात के आरोप लगे। उसमें 125 करोड़ के कमिशन के आरोपों को भी स्वागत किया। आईपीएल में झांकी जमाने में कोई कसर नहीं छोड़ी। फें्रचाइजियों से लेकर सेलिब्रिटीज के साथ खुलकर वक्त बिताया, क्रिकेट बोर्ड के पैसों पर जमकर ऐश की और जब लगा कि दुर्दिन आ सकते हैं, भैया मोदी भी ये जाए और वो जाए। अब ललित मोदी फक्त ऐसे ही मामलों के रिफरेंस के काम आते हैं। इससे ज्यादा उनके बारे में कोई मालूमात नहीं है। हालांकि उनकी जांच, पड़ताल और पैसा वसूली के लिए टीम जरूर लगी होगी। पहले ललित मोदी ने खाया अब वह टीम भत्ते उड़ा रही होगी। उड़ाती ही रहेगी। 

कहने की जरूरत नहीं है लेकिन इस कड़ी में अगला नाम संजय भंडारी जी का आता है और उसके बाद हर दिल अजीज नीरव मोदी, पत्नी एमी, भाई निशाल और मामा मेहुल चौकसी के साथ खड़े दिखाई देते हैं। न खाऊंगा और न खाने दूंगा के ध्येय वाक्य पर चल रही हमारी सरकार ने जबरदस्त सख्ती और सक्रियता दिखाते हुए मोदी और चौकसी के 35 से ज्यादा ठिकानों पर छापे मारे हैं, दो दिन में 5649 करोड़ की संपत्ति और हीरे-जवाहरात जब्त किए हैं। इसका खूब ढोल पीटा जा रहा है। बस कांग्रेस ही है जो कह रही है कि सारी बैंक मिला दें तो मोदी देश को 30 हजार करोड़ की टोपी पहनाकर गए हैं। हम सबके सिर पर वह टोपी आ चुकी है, कुछ दिन में टैक्स, सेज के रूप में दिखाई भी देने लगेगी। 

कहानी से शिक्षा एक वाट्स एप मैसेज देता है कि देश में रहना है तो ढाई-तीन लाख की कमाई का हिसाब देना होगा, वरना आप 8-10 हजार करोड़ रुपए लेकर देश से उड़ सकते हो।




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