युवा लेखकों की उड़ान को नया आसमान देती मिड नाइट डायरी।

By - हिंदी डाकिया





लड़खड़ाते क़दमों को चलना सिखाया आपने, और पंख फैलाना भी आप से सीखा है… युवा लेखकों की उड़ान को नया आसमान देती मिड नाइट डायरी


कानपुर बगिया क्रॉसिंग के पास स्थित बेक एंड मोर कैफ़े में हुआ ओपन माइक का सफल आयोजन। नये युवा लेखकों को नया मंच देने के अपने वादे को पूरा करते हुए इस ओपन माइक का आयोजन मिड नाइट डायरी की तरफ़ से किया गया। मिड नाइट डायरी का शहर में यह तीसरा ओपन माइक था। जहाँ एक तरफ़ मुंबई हेबिटेट में पर्फ़ॉर्म करने वाले प्रियंक श्रीवास्तव ने अपने अनुभव सबके साथ बाँटे, वहीं दूसरी ओर अनुज पांडेय और कृष्णा कुमार पांडेय जैसे नये युवा लेखकों के शब्दों का जादू भी सब पर ख़ूब चढ़ा। शहर में मिड नाइट डायरी के तीसरे ओपन माइक का सफल आयोजन में नौबस्ता के राघवेंद्र प्रजापति, यशोदा नगर की भावना त्रिपाठी और हरजेंद्रनगर के गोबिंद सिंह का महत्वपूर्ण योगदान रहा।

बी एन डी के प्रोफ़ेसर अरविंद सक्सेना ने ‘एक लड़का दीवाना हो गया’ कविता सुनाकर प्यार की एक नयी परिभाषा से सबको मिलवाया। साथ ही अकबरपुर के मुसाफ़िर तंज़ीम ने बैग के बोझ तले दब गये छोटे बच्चों की व्यथा का वर्णन अपनी कविता से किया। कविताओं और ग़ज़लों के इस सफ़र को सौरभ द्विवेदी ने अपनी कविता ‘मेरी प्रेम कहानी’ से आगे बढ़ाया। भावना और राघवेंद्र की जोड़ी की जुगलबंदी ने सबको पूरे प्रोग्राम में बांधे रखा।

शहर के ओपन माइक में हर बार की तरह इस बार भी उरई से शिवम कुशवाहा, उन्नाव से अनुभव कुश, अकबरपुर से मुसाफ़िर तंज़ीम, बरेली से अभिनव सक्सेना और मुंबई से प्रियंक श्रीवास्तव ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। इतना ही नहीं, ओपन माइक में शहर की युवतियों ने भी अपनी धाक जमाई। कानपुर की ही आरती चौधरी ने अपनी कविता से सबको ज़िंदगी के नये मायने सिखाये तो आयूषी पाल के लफ़्ज़ों के नये अन्दाज़ ने लोगों की तालियाँ बजाने पर मजबूर कर दिया। दीपांशी पांडेय ने ‘तुम आओ तो सही’ सुना कर सबको थोड़ा भावुक किया, साथ ही राघवेंद्र की मस्ती ने सबको ख़ूब हँसाया।

मिड नाइट डायरी के इस तीसरे ओपन माइक के आयोजन के मौक़े पर दिल्ली से अमन सिंह कुशवाहा (फ़ाउंडर, मिड नाइट डायरी) भी शहर आये। बातचीत के दौरान अमन सिंह जी ने बताया की मिड नाइट डायरी को लेकर शहर में उनके कई और बड़े प्लान हैं, लेकिन फ़िलहाल उनकी कोशिश है कि मिड नाइट डायरी से शहर के युवा लेखक़ और कलाकार अधिक से अधिक संख्या में जुड़े। ताकि सबको अपनी प्रतिभा और लेखन छमता को दिखाने का पूरा अवसर मिले। कुल हुयी २० प्रस्तुतियों में अमन ने भी अपनी कविता ‘लड़खड़ाते क़दमों को चलना सिखाया आपने, और पंख फैलाना भी आपसे सीखा है…’ जो कि उन्होंने अपने प्रोफ़ेससोर्स और अध्यापकों के लिये लिखी थी, से सबकी तालियों को अपने हिस्से किया।


प्रस्तुति देने वालों में से शहर के सौरभ द्विवेदी, अरविंद सक्सेना, शैलराज, आरती चौधरी, मनीष कुमार, कृष्णा कुमार पांडेय, अभिनव सचान, अनुज पांडेय, दीपांशी पांडेय, आयूषी पाल, सिखा सिंह, अरविंद द्विवेदी, शिवम कुशवाहा (उरई), अनुभव कुश (उन्नाव), मुसाफ़िर तंज़ीम(अकबरपुर), प्रियंक श्रीवास्तव (मुंबई) के अलवा कई और नये युवा चेहरे मौजूद रहे। सुनने वालों में कई वरिष्ठ थिएटर आर्टिस्ट ओमेंद्र कुमार (अनुकृति रंगमंडल, कानपुर), अरुणेंद्र सोनी (उत्तम कैरियर इंस्टिट्यूट, कानपुर), कॉलेज प्रोफ़ेससोर्स, कानपुर एफ एम चैनल के आर जे, युवाओं के माता पिता और मित्र शामिल रहे।  

मिड नाइट डायरी के कानपुर ओपन माइक के समापन के बाद अमन सिंह कुशवाहा (फ़ाउंडर, मिड नाइट डायरी) ने समवाद्दाताओं को बताया कि बिल्कुल ऐसे ही ओपन माइक का आयोजन उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में भी दिनांक २५ फ़रवरी २०१८ को किया गया है । साथ ही उन्होंने यह भी बताया कि युवाओं की लेखन में रुचि को देखते ही जल्द ही शहर में लेखन की वर्क्शाप का भी आयोजन किया जायेगा, जिससे शहर के युवा लेखन से जुड़ी बारीकियों को और बेहतर तरीक़े से समझ सकें और कुछ नया सीख सकें।



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