अंकित हॉर्नर किलिंग का नहीं बल्कि इंसानी राक्षसों की कायरता का शिकार हुआ है।

By - अजीत अंजुम

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अंकित नाम था उसका. फ़ोटोग्राफ़र था. गिटार बजाता था. गाने गाता था. मॉडलिंग और एक्टिंग में हाथ आजमाना चाहता था. यूट्यूब  पर अपना चैनल चलाता था. ज़िंदगी में अपने दम पर कुछ करने के सपने देखता था और एक मुस्लिम लड़की से प्यार करता था. प्यार करने वाले कहाँ धर्म और बंधनों की जकड़न की परवाह करते हैं. अंकित ने भी नहीं की. उस लड़की ने भी नहीं की. लड़की के घर वालों के ये प्यार क़तई मंज़ूर नहीं था. नतीजा ? अंकित सक्सेना का सरेआम क़त्ल कर दिया गया. उसका गला रेत दिया गया. लड़की के मामा, बाप ,भाई सबने मिलकर अंकित को मार डाला. 

अंकित लोगों से बचाने की गुहार लगाता रहा लेकिन कोई बचाने नहीं आया. अपने अंकित की हत्या के बाद वो लड़की सदमे में है. उसने अपने बाप -भाई -चाचा के ख़िलाफ़ बयान दिया है. क़ातिलों को पकड़ा जा चुका है. जिस माँ ने अपने सामने अपने लाड़ले की मौत देखी है , वो होश खो बैठी है. उसने अपने जिगर के टुकड़े के रेते हुए गले पर अपनी चुन्नी लपेटकर उसके बहते खून को रोकने की कोशिश की थी. आस पास से गुजरते लोगों से मदद मांगी थी. किसी ने मदद नहीं की. अस्पताल जाकर पता चला कि खून से लथपथ जिस अंकित को लेकर वो आई है , वो अब सिर्फ बेजान जिस्म है. वो मां , वो पिता ,कैसे भूलेगा अपने बेटे की मौत को. 

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अंकित की चीख पुकार पर भी अगर कुछ लोग जमा होकर बचाने की कोशिश करते तो शायद वो बच जाता. किसी ने नहीं बचाया उसे. उन चंद मिनटों में अंकित पर क्या गुजरा होगा , सोचकर सिहर उठता हूं.  कितने बर्बर होंगे वो लोग , जिन्होंने अंकित को यूं तड़पाकर मार डाला है. 

मैं लगातार इंसानों के भीतर पलते राक्षसों के बारे में सोच रहा हूँ. राक्षसों का शिकार हुआ है अंकित. एक प्यारा सा लड़का , जो किसी से प्यार करता था , जो किसी के साथ सपने देखता था , उसका यूं मारा जाना मुझे परेशान कर गया है. वो लड़की टैगोर गार्डन मेट्रो स्टेशन के पास अपने अंकित का इंतजार कर रही थी और इधर उसके घर वाले अंकित का गला रेत रहे थे. गिड़गिड़ाते , चिल्लाते उस लड़के पर चाकू चला रहे थे. अंकित के घर अपनी बेटी की तलाश में पहुंचे वो लोग चाकू लेकर आए थे. इसका मतलब खूनी इरादे से ही आए थे. अंकित को मारने वालों में उस लड़की का नाबालिग भाई भी था. 

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अंकित चला गया. वो लड़की, जिससे वो प्यार करता था, अब शेल्टर होम में है. पता नहीं उसकी कोई खोज खबर लेगा भी या नहीं. उसके परिवार वाले तो जेल गए. जिस घर में वो जाना चाहती थी, उस घर में मातम है. अब इसको सिर्फ हिन्दू मुस्लिम रंग देते समय आप उन हत्याओं को भूल सकते हैं , जो ऑनर किलिंग के नाम पर हुई हैं. खाप पंचायतों के क़ातिल फ़रमान किसी हिन्दू -मुस्लिम प्रेम के ख़िलाफ़ नहीं निकलता रहा है. सजातीय और अंतरजातीय प्रेम का ख़ूनी अंजाम हम सब देखते रहे हैं. जो मेमोरी लॉस के शिकार हैं , वो गूगल करके देख सकते हैं.








Source - Post is taken from Journalist Ajit Anjum facebook wall.

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