नानी अपनी मड़ई में बैठे-बैठे शहर से आने वालों की बाट जोहती हैं।


Credit - अभिव्यक्ति.कॉम
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भोली सी शक्ल वाले इस शख्स ने नानी पर एक प्यारा सा लेख लिख भेजा है। इनका नाम प्रशांत है। जौनपुर के रहने वाले है। पेश से पत्रकार है और फिलहाल एक न्यूज एप्प के लिए लिखते हैं।

वैसे तो वो गांव के सभी बच्चों की दादी लगती हैं लेकिन उनकी बेटी का लड़का रमेश बचपन से ही उनके साथ रहा है तो उसके साथ-साथ सभी बच्चे उनको नानी ही बुलाते हैं। यहाँ तक बड़े लोग भी उनको रमेश की नानी से ही सम्बोधित करते हैं। लेकिन रमेश जब बड़ा हो गया तो उसे कमाने के जाना पड़ा, कुछ दिन तक तो रिश्तेदारों और उनकी बेटियां उनके साथ रहीं लेकिन कोई कितने दिन तक रहता। सबका अपना-अपना परिवार है अपनी-अपनी ज़िम्मेदारियाँ है तो गए सब अपने काम पर। रह गई तो सिर्फ अकेली नानी और मन में टीस उठाने वाली हज़ारों यादें। नाना थे तो बोलने के लिए कोई तो था लेकिन 2 साल पहले नान के जाने के बाद तो इसकी भी गुंजाइश नहीं रही।
गावं में किसी के घर में शादी हो नानी पहले खुश हो जाती हैं जैसे उनके बच्चों की ही शादी हो और अपनी झुकी कमर के साथ सबकी ख़ुशी में शामिल होती हैं और उसके बाद….. उसके बाद तो बस वो दिनभर बैठे-बैठे देखती रहती हैं कि कोई तो आए उनके पास बैठे और गावं-शहर की खबर बताए। जब भी मैं गांव जाता हूँ तो एक बार उनके पास ज़रूर जाता हूँ, वो मुझे देखते ही ऐसे भावुक हो जाती हैं कि रोने लगती हैं और फिर बातों का सिलसिला शुरू हो जाता है। पूरे खानदान का हालचाल ले लेती हैं एकसाथ। और ये सुनने के बाद उनकी आँखों और चेहरे पर एक सुकून दिखता है मुझे। कभी-कभी नहीं रहा जाता तो अपना दुःख भी बताती हैं और पूरे वक्त उनकी आँखें बहती रहती हैं।
लेकिन इतने दिनों बाद  बैठता है उनके पास तो उससे उनका मन कहाँ भरता है। पड़ी रहती हैं अपने घर में, कभी मन किया तो खाना बनाया कभी नहीं। कभी गावं से कोई आया बना दिया तो खा ली। सोचता हूँ कितनी अकेली हैं वो, अपनी बात भी नहीं कह सकती किसी से क्योंकि कोई है ही नहीं जिसके पास उनकी बात सुनाने का वक्त हो। मैं तो बस यही सोचकर हैरान होता रहता हूँ की वो दिनभर सोचती क्या होंगी? क्या चलता होगा उनके मन के अकेलेपन में। शायद अपना अतीत देखती हों या अपने वर्तमान पर हैरान होती होंगी।
इस बार तो बहुत दिन हो गए उनसे मिले। कभी-कभी लगता है कि शहर और नौकरी के सिलसिले में इतने आगे चले आते हैं हम की बहुत लोग बहुत पीछे छूट जाते हैं। साथ ही पीछे छूट जाता है उनका स्नेह और प्यार भी।


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