उस्ताद बिस्मिल्लाह खां जिन्होंने अकेले शहनाई को प्रसिद्धि दिलाई।



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देश को जिस दिन आजादी मिली आजादी के जश्न में उस्ताद बिस्मिल्लाह खां की शहनाई ने जश्न के रंग में धुन के रंग डाले थे और हर स्वतंत्रता दिवस पर प्रधानमंत्री के भाषण के बाद खां की शहनाई बजाना रस्म हो गई हैं।

बिस्मिल्लाह तीसरे भारतीय संगीतकार थे जिन्हें भारत रत्न दिया गया। बिस्मिल्लाह पहले ऐसे व्यक्ति थे जिन्होंने अकेले शहनाई को प्रसिद्धि दिलाई। आज उनके जन्मदिवस के अवसर पर गूगल ने भी उनपर डूडल बनाकर उन्हें सम्मानित किया है।

बनारस में उनके घर को बिस्मिल्लाह होटल के नाम से जाना जाता था क्योंकि ऐसा माना जाता था कि बिस्मिल्लाह के दरवाजे पर जो भी आ जाता था वह भूखा नहीं जाता था । वहां उसे खाने को कुछ ना कुछ मिल ही जाता था।

बिस्मिल्लाह खां स्वभाव से सरल और उदार थे । वे अपने काम को भगवान की तरह पूजते थे । इतना यश मिलने के बाद भी रिक्शे में घूमा करते थे और कूलर जैसी साधारण आवश्यकता की वस्तु से भी परहेज करते थे।

उन्हें बनारस से इतना लगाव था कि वे कहते थे कि जब मैं विदेशों में शहनाई बजा रहा होता हूं तो मुझे अपनी आंखों के सामने बनारस नजर आता है। और जब मैं बनारस में शहनाई बजा रहा होता हूं तो मुझे गंगा मैया नजर आती हैं।




(18 मार्च 2018 के 'जनसत्ता' से )


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