तुम्हारे सपनों से रोज़ खिलवाड़ होने की ख़बरें कोने में कतरनों की शक्ल में छप रही हैं।


आयकर विभाग में ख़ाली हैं 30 हज़ार से ज़्यादा पद, सारे बिजी हैं भाषणबाज़ी में।

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आयकर विभाग में 50 फीसदी पोस्ट ख़ाली हैं। ग्रुप सी काडर में 62 हज़ार 954 पद स्वीकृत हैं। इनमें से 30, 205 पद ख़ाली हैं। स्टाफ रखे नहीं जा रहे हैं और आउट सोर्स के ज़रिए काम कराया जा रहा है। उज्जैन के भास्कर में ख़बर छपी है कि इनकम टैक्स एम्पलाइज़ फेडरेशन की चार दिनों की बैठक में ये मांग रखी गई है। तो बेरोज़गार युवकों तुम करो हिन्दू मुस्लिम, इधर तुम्हारे सपनों से रोज़ खिलवाड़ होने की ख़बरें कोने में कतरनों की शक्ल में छप रही हैं।

भारत के बैंकिंग सेक्टर में एक ऐतिहासिक घटना होने जा रही है। पंजाब नेशनल बैंक एक दूसरे बैंक यूनियन बैंक ऑफ इंडिया की नज़र में डिफॉल्टर बनने जा रहा है। 31 मार्च तक पंजाब नेशनल बैंक को 1000 करोड़ रुपये चुकाने हैं।  पंजाब नेशन बैंक के लेटर ऑफ अंडरस्टैंडिंग के कारण यूनियन बैंक ने 1000 करोड़ का भुगतान किया था। उसी पैसे को चुकाना है। पहली बार बैंक ही डिफॉल्टर हो सकता है।

CIEL की रिपोर्ट है कि पिछले साल टेलिकॉम सेक्टर में 40,000 लोगों की नौकरियां गईं हैं। आने वाले दिनों में यह संख्या 80 से 90 हज़ार तक पहुंचने वाली हैं। फिर इसी रिपोर्ट के साथ बिजनेस स्टैंडर्ड में टेलिकॉम सेक्टर स्किल काउंसिल TSSC के सीईओ का बयान छपा है कि अगले पांच साल में इस सेक्टर में एक करोड़ नौकरियां पैदा होंगी। सबको खुश करना है तो कुछ भी बोल देना है। एक करोड़ नौकरी बोल दो ताकि लोग सपने देखें। कुछ भी चल जाता है। जिस साल 90 हज़ार नौकरियां जाने का अंदेशा हो उस साल ये दस लाख नौकरियां पैदा करने की बात करते हैं।

भारत से बड़ी संख्या में छात्र अब बाहर के देशों में पढ़ने के लिए जाने लगे हैं। छात्र तो जा ही रहे हैं और उनके साथ भारत का पैसा भी जा रहा है। भारत के रद्दी कालेजों की हालत के हिसाब से ये सारे छात्र बिल्कुल ठीक कर रहे हैं। न तो यहां के समाज को फर्क पड़ रहा है और न ही भारत की राजनीति को। जो छात्र जाने से रह गए हैं उसमें भी दो कैटगरी के हैं। 90 फीसदी कालेज के छात्र फालतू मुद्दों पर तो सक्रिय हैं मगर शिक्षा की हालत पर बहस छोड़कर कोचिंग में घुस गए हैं। जो विरोध प्रदर्शन के लिए निकलते हैं, उनका भी साथ नहीं देते हैं।

विदेश जाने वाले सारे छात्र अमीर हैं यह मिथक हो सकता है। निश्चित रूप से अमीरों के बच्चे ज़्यादा हो सकते हैं मगर अब मां बाप बेट काट कर वहां भेजने लगे हैं। यहां भी तो वही करना होता है मगर पैसा जाता है, शिक्षा नहीं मिलती है। इसका नतीजा यह हो रहा है कि हर साल यहां से ज़्यादा पैसा बाहर जा रहा है। वित्त वर्ष 17 के पहले दस महीने में 4.7 अरब डॉलर बाहर गया, वित्त वर्ष 18 के पहले दस महीनों में यह बढ़ कर 8.17 बिलियन डालर गया है। इकोनोमिक्स टाइम में गायत्री नायक की रिपोर्ट विस्तार से पढ़ सकते हैं।

150 करोड़ से ऊपर के 359 इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट की लागत में 220 ख़रब की वृद्धि हो चुकी है। विभिन्न कारणों से देरी के कारण न सिर्फ पूरा करने में समय ज़्यादा लग रहा है बल्कि इसकी लागत भी बढ़ती जा रही है। बिजनेस स्टैंडर्ड की रिपोर्ट। 

चीन और भारत के बीच व्यापार घाटा बढ़ता ही जा रहा है। भारत चीन से 61.2 अरब डॉलर का आयात करता है जबकि निर्यात मात्र 10.2 अरब डॉलर का कर पाता है। कुछ अतिउत्साही होली दीवाली पर चीन के माल का विरोध करने लगते हैं, लगता है उनके विरोध का असर नहीं हो रहा है। इस व्यापार घाटा को कम करने के लिए बातचीत होती रही है, होती रहेगी मगर 10 अरब से 61 अरब तक पहुंचने में जाने कितने और झूठ की ज़रूरत होगी। 2012-13 में भारत चीन को 14.82 अरब डॉलर का निर्यात करता था जो 2016-17 में 10.17 अरब डॉलर पर आ गया है। यानी हमारा निर्यात घटा ही है। यानी चीन का हम कुछ नहीं बिगाड़ सके हैं। बिजनेस स्टैंडर्ड की रिपोर्ट। 

क्या आपको पता है कि रविवार को मुंबई का तापमान 41 डिग्री सेल्सियस चला गया था ?





साभार रविश कुमार के फेसबुक पन्ने से।

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