हम स्त्रियों से प्रेम क्यों करते हैं ?

By - हिंदी डाकिया

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हम पुरुष स्त्रियों से इसलिए प्यार करते हैं कि भरपूर उम्र हो जाने पर भी उनके भीतर एक लड़की छुपी होती है.

क्योंकि किसी बच्चे के करीब से गुज़रते समय वे मुस्कुराना नहीं भूलतीं.

क्योंकि जब हम उन्हें सड़क पर चलता देखकर कमेन्ट करते हैं तो वे पलटकर कोई जवाब नहीं देतीं और मुस्कुराती भी नहीं हैं.

क्योंकि वे रात में खुल जाती हैं… इसलिए नहीं कि यह उनके चरित्र की विकृति है… वे तो हमें खुश देखना चाहती हैं.

क्योंकि वे स्वयं को सुन्दर और सुगठित बनाने के लिए पार्लर और जिम की यातनाएं झेलतीं हैं और उफ़ तक नहीं करतीं.

क्योंकि वे सलाद खाना पसंद करती हैं.

क्योंकि वे अपने चेहरे को उतनी ही शिद्दत और यकीन से रंगती हैं जैसे माइकलएंजेलो सिस्टीन चैपल पर काम करता था.

क्योंकि वे बार-बार हमसे यह पूछती हैं – “बताओ, मैं कैसी लग रही हूँ?”

क्योंकि वे समस्याओं को अपने तरीके से सुलझाती हैं और हम इसपर बहुत खीझते हैं.

क्योंकि वे करुणावान है और जब हम उन्हें प्यार करना कम कर देते हैं तो वे हमसे कहती हैं ‘मैं आपसे बहुत प्यार करती हूँ’ और इस तरह वे हमें इशारा करती हैं और अपना प्यार जताती हैं.

क्योंकि कभी-कभी वे हमें बताती हैं कि उन्हें सर्दी हो गयी है या उनके जोड़ों में दर्द है, और तभी हमें यह पता चलता है कि वे भी हमारी तरह इंसान हैं.

क्योंकि जब हमारी सेनाएं एक दुसरे के मुल्कों में घुसी चली आती हैं उस समय भी वे अपने चौके-चूल्हे में बेख़ौफ़ बनी रहतीं हैं.

क्योंकि वे हमारे जैसे कपड़े पहनकर काम पर जा सकती हैं जबकि कोई मर्द उनकी कुर्तियाँ पहनकर बाहर निकलने की हिम्मत नहीं कर सकता.

क्योंकि फिल्मों की तरह – सिर्फ फिल्मों की तरह ही – वे रात में हमारे करीब आने से पहले सुगंधित स्नान नहीं करतीं.

क्योंकि जब हम उन्हें कहते हैं कि फलां औरत बहुत सुन्दर लग रही है तब वे उसमें कोई-न-कोई पक्का खोट निकालकर बता देती हैं ताकि हमें अपने ख़याल पर शक होने लगे.

क्योंकि वे फ़िल्मी तारिकाओं की तरह चरमोत्कर्ष पर पहुँचने का सटीक दिखावा कर सकतीं हैं.

क्योंकि जब हम पुरुष अपनी सूखी चाय और पुरानी शराब से ही चिपके रहते हैं तब वे बेहतरीन रंगीन घालमेल बनाकर दिखाती हैं और अपने नाजुक महीन बुंदनों पर इठला सकती हैं.

क्योंकि उन्हें कहीं कोई पुरुष भा जाता है तो वे उसे ज़ाहिर करने में वक़्त नहीं गंवातीं.

क्योंकि वे हमें जन्म देती हैं और हमें खुद में समा लेती हैं, और यह जब तक नहीं होता तब तक हम उनकी काया और आत्मा की परिक्रमा करते रहते हैं.

और सबसे विशेष बात ...हम उन्हें स्त्री होने के नाते ही प्रेम करते हैं!





यह लेख नाज़िया नईम की Facebook साभार है।

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