किसान क्या करे ?

By - धैर्यकांत



झंडा लेकर निकले तो नौटंकी , विष्टा खाये तो नौटंकी , भूखे मरे तो नौटंकी और आत्महत्या कर ले तो नौटंकी। हर समूह , चाहे वो किसानो का हो या कर्मचारी वर्ग का हो , कोई न कोई राजनैतिक पार्टी उसको चलाती है , जैसे कुछ मजदूर यूनियन बीजेपी के है तो कुछ लेफ्ट वालो के और ये आज की बात नहीं है , अरसे से चला आ रहा है। ये भाजपा के लोग इशारो इशारो में किसान रैली को नौटंकी कह के अपनी विफलताओं को छुपाने की कोशिश करते है , उनको ये बताया जाए की नौटंकी होती है क्या ?

नौटंकी होती है गले में आलू प्याज लटकाकर महंगाई का विरोध करना और सत्ता में आते ही अनुकूल परिस्थितिओं के बावजूद पेट्रोल डीज़ल का दाम बढ़ा कर अर्थशास्त्र का ज्ञान देना , नौटंकी होती है मुंह में काला पट्टा बांधकर मल्टी रिटेल में एफडीआई का विरोध करना और फिर सत्ता में आकर उसी एफडीआई को अपनी उपलब्धि बताना। नौटंकी होती है जीएसटी और आधार को लेकर रंडी-क्रंदन का वैश्विक आयोजन करना और फिर वापस से उसी को लागू करके इज़ ऑफ़ बिज़नेस का ढोल पीटना।

जो पार्टी CAG के २जी आंकलन पे इतना बवाल काटती है और खुद के शासन काल में CAG द्वारा उठाये गए सवालो पे ललोचप्पो करती है , सही मायनो में इसको ही नौटंकी कहते है। अगर नीतियों के आधार पे नुकसान का जायजा लेना है तो सरकार CAG से इस बात कि जांच करवा ले कि नोटबंदी होने से कितना लाभ हुआ है और इसके नहीं होने से सरकार को कितना नुकसान हो जाता , दोनों का अंतर सरकार बता दे , जैसे विनोद राय ने 2G वाले मामले में किया था। लेकिन ऐसा होगा नहीं , क्यूंकि इस नौटंकी की पटकथा बहुत तटस्थ है और कालांतर में जब इसपर बहस होगी तब पता चलेगा की ये भारतवर्ष की सबसे चालाक नौटंकी थी।

इस नौटंकी में सब नंगे है , सबका गुरुर दिख रहा है , वही गुरुर जो कांग्रेस को था , वही गुरुर जो लालू का था और वही गुरुर जो केजरीवाल को भी है। आज पचास हज़ार है , कुछ दिन में पचास लाख हो जायेंगे ,एक दिन मूड गर्माएगा , नौटंकी हमेशा के लिए यही लोग मिलके खत्म कर देंगे,फिर नाचते रहिएगा आजतक का एंकर बनकर।




धैर्यकांत एक मस्तमौला लेखक हैं। लेखन में ये सिर्फ एक विषय तक सीमित नहीं है इनके फेसबुक वॉल पर आपको अलग अलग तरह के लेख पढ़ने को मिल जायेंगे। कीर्ति आजाद से इनका रिश्ता दिल्ली के घनघोर फोग की तरह है जिन्हें ये पसन्द नही करते। #लहेरिया नाम से ये एक फ़ेसबुक पेज चलाते है। फिलहाल ये एक वेबसाइट से जुडे हुए है और एक RTI एक्टिविस्ट है।


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