धोबी घाट को मिटाने की साजिश।

पुलिस, बीएमसी आॅफिसर, बिल्डर और लोक प्रतिनिधि की साठगांठ।

By - उमेश गुजराती


1890 के दौर में ब्रिटिश शासन के दौरान बने ऐतिहासिक धोबी घाट को हड़पने का षड्यंत्र शुरू हो गया है। गौरतलब है धोबीघाट पर किसी भी तरह का निर्माण कार्य नहीं हो सकता है, यह बात सरकार पहले ही स्पष्ट कर चुकी है। धोबीघाट के 28,156.32 वर्ग मीटर पर एसआरए योजना चल रही है, जिसमें से 7,724.61 वर्ग मीटर कपड़ा सुखाने की जगह रस्सीधारक धोबी समुदाय की है। धोबी समुदाय के लोगों का कहना है कि इस इलाके के पुनर्निर्माण की जिम्मेदारी ओमकार बिल्डर्स को 2015 में प्रशासन ने दी थी, लेकिन प्रशासनिक मुहर लगते ही बिल्डर ने अपनी साजिश रचनी शुरू कर दी है।

पिरामल रियल्टी ने महालक्ष्मी में 12 एकड़ जमीन पर पसरी एक आवासीय परियोजना को चलाने के लिए ओमकार डेवलपर्स के साथ हाथ मिलाकर धोबी घाट को मिटाने की ओर कदम बढ़ा दिया है। गौरतलब है कि धोबी कल्याण के नाम पर बनी सोसाइटी के एक पूर्व चेयरमैन संतोष कनौजिया ने बिल्डरों से करोड़ों रुपए खाकर धोबियों के साथ विश्वासघात किया। धोबियों ने पूर्व चेयरमैन पर बहुत भरोसा किया था, लेकिन उसने ही लूट लिया। ऐसा आरोप वरिष्ठ अधिवक्ता दिलीप इनकर ने लगाया।

यह है मामला 

धोबियों को बड़ी साजिश के तहत शिकार बनाया गया है। दरअसल, एसआरए योजना सिर्फ झोपड़ाधारकों पर लागू होती है और रस्सी वाले इलाके में यह योजना नहीं लागू की जा सकती है, लेकिन मनपा आयुक्त ने एसआरए योजना को इस शर्त पर मंजूरी दे दी थी कि डेवलपर को रस्सीधारक धोबियों की सहमति लेनी होगी। इसके बाद साईबाबा नगर सोसायटी की सहमति से ओमकार रियल्टर्स प्रोजेक्ट्स प्राइवेट को एसआरए के तहत इस इलाके को विकसित करने की मंजूरी दे दी गई थी। 

पूर्व चेयरमैन ने हड़पे करोड़ों रुपए 

धोबी कल्याण ऐंड औद्योगिक विकास कोआॅपरेटिव सोसायटी लिमिटेड के पूर्व चेयरमैन संतोष कनौजिया लगभग 20 करोड़ रुपए खा गया। धोबियों का कहना है कि हमलोग उसी के भरोसे थे, लेकिन उन्होने बहुत पैसे खा लिए। उसने तीन बिल्डरों मैराथन, लोखंडवाले और ओमकार बिल्डर्स से 50 करोड़ रुपए का डील कर लिया। ओमकार से तो संतोष ने बहुत पैसे खाए और हमसे कहा कि धोबियों को कुछ देना ही नहीं है। हमने जब कहा कि रस्सी हमें साइड में चाहिए, तो उसने कुछ सुना ही नहीं। उसने कहा कि रस्सी क्या गांव से लाया है?  ऐसे अपमानजनक शब्दों का प्रयोग करके हमें तंग करने लगा। 

संतोष कनौजिया ने सोसाइटी में भी शौचालय घोटाला भी किया। सोसाइटी में एक पब्लिक शौचालय है जिसका रोज का 5 से लेकर 6  हजार रुपए आता है, लेकिन वह सब पैसे हड़प गया। धोबियों का कहना है कि कपड़े धोने की जगह तो है, लेकिन सुखाने की जगह नहीं है, सुखाने की जगह हड़प लिया गया है और धोबी घाट पर नजर है। ओमकार बिल्डर के बाबूलाल वर्मा और संतोष कनौजिया से संपर्क नहीं हो पाया। 



बहुत बड़ी धोखाधड़ी 

1999 में फाउंडर चेयरमैन उमाशंकर मिश्रा ने हमारे लिए हाई कोर्ट में पीआईएल डाल दिया था। उमाशंकर की मौत के बाद संतोष ने आकर सबकुछ बिगाड़ दिया और घोटाले करने लगा। फिर 2016 तक सोसाइटी का कोई इलेक्शन नहीं हुआ। संतोष ने सोसाइटी मेंबरों और हम धोबियों के अनपढ़ होने का भरपूर फायदा उठाया। वह फिल्म शूटिंग के पैसे हड़पने के साथ ही कई तरह के घोटालों में लिप्त हो गया। शौचालय और मेंबरशिप के पैसे भी खा गया। ओमकार बिल्डर को वही लाया। बिल्डरों की मिलीभगत से उसने खूब रकम बनाई और धोबियों को उल्लू बनाता रहा। लोगों पर झूठा केस दर्ज करवाता रहा। 

बाहरी महिलाओं से लगवाते हैं छेड़खानी के आरोप

पूर्व चेयरमैन संतोष कनौजिया ने धोबियों को डराने का काम किया और उनपर झूठे केस डलवाए। धोबियों ने बताया कि बाहरी महिलाओं को बुलाकर हम पर छेड़खानी का आरोप लगाया जा रहा है। इसके अलावा वह सबको गाली देकर लोगों को डराने लगा। पुलिस का पूरा सपोर्ट भी उन्हीं को है, इसलिए वे फोन पर खुलेआम धमकी दे रहे थे। एक महिला को पैसे देकर धोबियों पर झूठमूठ का छेड़खानी का आरोप लगवाया गया। 

जबर्दस्ती काट दी रस्सी 

वृक्षापति मलन्ना नामक धोबी की रस्सी जबर्दस्ती काट दी गई। उस दौरान सब लोग डर गए। बीएमसी के रूल से हर पत्थर को 2 रस्सी है। इसके हिसाब से बीएमसी की ओर से 7724 किमी धोबियों के लिए आरक्षित है, लेकिन बिल्डर ने इस पर कब्जा कर लिया। इसके बाद बड़ी संख्या में गुंडे लोग आए और तोड़फोड़ की। धोबियों ने बताया कि उनके पास रिकॉर्डिंग भी है। इनको रोजी-रोटी भी छिन गई। इसके बाद बिना नोटिस के ही बीएमसी और पुलिस ने उनके घर को तोड़ दिया। 

कपड़े सुखाने की जगह वापस धोबियों को लौटाई जाए

धोबियों का कहना है कि हमारे पास कपड़ा धोने की जगह बची है, लेकिन कपड़ा सुखाने की जगह बिल्डरों ने हड़प ली है। अब उनकी नजर कपड़ा धोने की जगह मतलब धोबी घाट पर है। धोबियों का कहना है कि यदि हमसे यह भी छीन लिया गया, तो हम भूखों मर जाएंगे। उन्होंने बताया कि हमसे जो जमीन हड़पी गई है, वह भी हमें वापस दी जाए। 



मुंबई की पहचान

धोबी घाट को मुंबई की पहचान कहा जाता है। यहां तकरीबन 20,000 वर्ग फुट जगह पर कपड़े धोए जाते हैं और पड़ोस में 30 से 40 हजार वर्ग फुट में इन्हें सुखाया जाता है, लेकिन  पुनर्विकास के नाम पर बिल्डर की नजर यहां गड़ी है। बिल्डर मोटा मुनाफा कमाने के फेर में लगे हैं और धोबियों को बहुत परेशान कर रहे हैं। यहां मेहनतकश धोबी समुदाय अपना पसीना बहाकर दो वक्त की रोटी खा पाता है। 

आमिर खान ने दिए थे 50 लाख, चेयरमैन ने हड़प लिया
आमिर खान ने ‘धोबी घाट’ फिल्म की शूटिंग के बाद धोबी विकास के लिए 50 लाख रुपए रुपए दिए, लेकिन पूर्व चेयरमैन कनौजिया ने सब हड़प लिया। हम धोबियों को एक पैसा भी नहीं मिला। आमिर ने खुद कहा था कि धोबियों के विकास के लिए हमने चेयरमैन को पैसे दिए थे। ऐसे हर महीने कहीं न कहीं से पैसे आते थे लेकिन यह पूर्व चेयरमैन संतोष सब पैसे हड़प लेता था। यह आरोप वकील दिलीप इनकर ने लगाया है।  

_____ नंबर गेम_____
* 2600 करोड़ में कपड़े सुखाने की जगह बेची, अब धोबी घाट पर नजर
* 731 पत्थर पर होता है काम
* 5000 परिवार की रोजी रोटी चलती है
* 7000 करोड़ का घोटाला
* 128 साल पुरानी एशिया का सबसे बड़ा ओपन लांड्री




यह लेखक उमेश गुजराती फेसबुक पन्ने साभार हैैं।




Comments