बचपन में ऐसे सिखाया था सबक हस्तमैथुन करने वाले को।


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By - मीना

बात उन दिनों की है जब मैं स्कूल में थी। और हस्तमैथुन की घटनाएं मेरे साथ 11वीं कक्षा से घटनी शुरू हुई थी। सिर्फ मेरे साथ ही क्यों बल्कि मेरी जैसी और भी लड़कियां जो इस समाज में रहती हैं उन्होंने भी अपने जीवन मे कई बार इस तरह की समस्या को देखा होगा। बस फर्क ये है कि कुछ बता देती हैं तो कुछ नहीं बता पाती।

वो दौर हम सभी क्लास की लड़कियों के लिए भूचाल से कम नहीं होता था क्योंकि एक तो हम लोग समझ नहीं पाते थे कि क्लास की खिड़की के बाहर जो आदमी खड़ा है और अपनी पैंट उतारकर जो हरकत वो कर रहा है...आखिर वो क्यों कर रहा है? बस वो सब देखने में डरावना लगता था इसलिए क्लास के बाहर भाग जाते थे।

दरसअल उस समय हमारे स्कूल के बाहर की बाउंड्री बार-बार स्कूल प्रशासन द्वारा बनवाई जाती थी और उसे बार-बार वो 20 से 25 शरारती तत्त्वों का समूह रात में तोड़ देता। हम लड़कियां उन लोगों से तंग थीं। फिर सिक्युरिटी गार्ड वहां तैनात किया गया पर एक गार्ड कितनी क्लासिस के बाहर खड़ा हो सकता था। 

वो अलग-अलग आदमी मुंह पर कपड़ा बांधकर आते और अपनी पैंट उतारकर क्लास की लड़कियों के सामने अध्यापिका की अनुपस्थिति में हस्तमैथुन करना शुरू कर देते। एक दिन हम लड़कियों ने ही प्लान बनाया और क्लास की एक सहेली के चाचा जो कि पुलिस में थे उन्हें ये सारी बातें बताईं। अगले दिन वो आदमी फिर आया और हस्तमैथुन करने लगा। 

हम लड़कियों को ये समझ आ गया था कि इस तरह के जो भी आदमी आते हैं उनकी तरफ हम लोग जितना देखतीं हैं ये उतना ही और मजा लेते हैं। तो उस दिन भी हमने ऐसा ही किया। और वो आदमी घंटो अपनी हरकतें करने में लगा हुआ था। और अचानक ही दोस्त के चाचा सिविल ड्रेस में उस आदमी के पीछे आ धमके...उसे घसीटकर हाइवे से स्कूल के अंदर लाया गया। फिर जो पूरे स्कूल की लड़कियों ने उसको सूता है और कूटा है ये तो वही आदमी जानता होगा। और फिर सलाखों के पीछे वो किया गया।

इस स्टिंग के बाद स्कूल में इस तरह की घटनाएं बन्द हो गईं। लेकिन बाहर गली-सड़क कहीं पर भी इस गंदी मानसिकता के लोग आज भी मिल जाते हैं। जिनसे अब हम डरते नहीं बल्कि सीधे काट डालने की धमकी देते हैं। और यकीन मानिए आपकी निडरता ही आपका सबसे बड़ा सम्बल बन जाती है। 

तो निष्कर्ष ये है कि अगर आपके आसपास भी ऐसा कुछ घटित हो रहा है तो प्लीज़ उसे इग्नोर मत करिए। उससे लड़िये वरना क्या मालूम कब आपके घर से कौन निर्भया, जैनब, कठुआ या उन्नाव बन जाये, क्योंकि आज जो छोटी बच्चियों के सामने हस्तमैथुन कर अपनी वासना को शांत कर रहा है। कल वो बलात्कार भी करेगा। इसलिए अपने समाज को और अपनों को भी समझिए...





यह लेख दिल्ली से मीना ने लिख भेजा हैं। उन्हें लिखने का सिर्फ शौक ही नहीं ये उनका पेशा भी है। कविता, कहानी, राजनीति और महिला मुद्दों जैसे विषयों पर लिखती है। सिर्फ लिखती ही नहीं बल्कि उन मुद्दों पर समाज में काम भी करती हैं। लिखना उन्हें पसंद है शायद इसीलिए वो एक पत्रकार हैं।



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