ख़ुद के मातम में ख़ुद ही रोये ज़ार-ज़ार।








तुम मुझे कभी कभी दिल्ली सी लगती हो एकदम दिलफ़रेब और झूठी। दिल्ली ने हर किसी से झूठ बोला कि वो उससे बहुत मोह्हबत करती है। कितने सुल्तान आये और ना जाने कितने ज़मींदोज़ हो गए उसी धूलभरी मिट्टी में जिसपर वो हुक़ूमत करना चाहते थे। ख़ैर पुरानी आदत है मेरी की मैं सबको दिल्ली से मिलाने लगता हूँ लेकिन कभी नहीं सोचा था कि तुम किसी और से मिल पाओगी।

तुम्हारी हँसती हुई तस्वीरें देखी, एक बात बताओ कैसे हँस लेती हो तुम इतना सब होने के बाद भी। मुझसे तो ऐसी झूटी हँसी नहीं लाई जाती है। मैं तुम्हारी तरह दिलफ़रेब नहीं हूँ।

मुझे जलाने की नाक़ाम कोशिशें मत करो जान मैं बरसों पहले किसी अपने को फूँक आया हूँ, याद है ना। बरसों बात कुछ ख़्वाब देखने की हिम्मत लाया था कि शायद अब ज़िंदगी सामने है लेकिन नहीं जानता था कि तुम शायद दिल्ली की सल्तनत हो गई हो।

ये तस्वीर देख रही हो ये हौज़ ख़ास है जहाँ पर इश्क़ के नए परिंदे उड़ान भरते हैं मेरी पसंदीदा जगहों में से एक है ये। अगर कभी तुम यहाँ जाओ किसी और के साथ तो कोई वादा मत करना क्यूंकि वादे ना निभाने की आदत है तुम्हारी।

सुना है हम सब मर जायेंगे एक दिन और उस दिन एक अदालत बैठेगी जहाँ पर फ़ैसले सुनाए जाएंगे ज़िंदगी भर के मुझे उम्मीद है तुम नज़र मिलाकर बात कर पाओगी उस दिन मुझसे।

वादे करने दुनिया की सबसे ओवररेटेड चीज़ है कोई भी कुछ भी वादा कर देता है और हम यक़ीन कर लेते हैं। तुम्हें किसी और के साथ देखकर बहुत दिल जल जाता है जानता हूँ कि आम आशिक़ों वाली हरक़त है ये लेकिन जान मेरा इश्क़ आम नहीं है। ये तुम्हारे उन "ख़ास लोगो" की तरह बाज़ार में नहीं बिकता है।

ख़ास लोगो को मेरे तुम्हारे बीच आने से रोको।

सुना है लिखने लगी हो और पता है ये एक अच्छी ख़बर है क्यूंकि ज़िंदगी तुमसे बहुत सवाल पूछेगी जहाँ मैं नहीं रहूँगा और तुम ज़्यादा बोलना पसंद नहीं करती हो शायद लिखना काम आ जाये। 





Comments