साम्प्रदायिक बदहाली से जूझ रहे भारत को गगनदीप जैसे अफसर की जरूरत हैं।



फ़ोटो - गूगल

22 मई को उन्होंने नैनीताल के गिरजा देवी मंदिर में एक युवक को मोब लिंचिंग का शिकार होने से बचाया. वह युवक मंदिर में अपनी प्रेमिका के साथ आया हुआ था. मंदिर की खूबसूरत लोकेशन की वजह से प्रेमी युगल प्रायः वहां आते रहते हैं. 

मंदिर में उस वक्त बखेड़ा खड़ा हो गया जब लोगों को पता चला कि युवक मुस्लिम है और युवती हिन्दू. लोगों की भीड़ ये जानते ही उस युवक को मारने के लिए हिंसक हो गयी. इतना ही नहीं भीड़ में उपस्थित कई लोग युवती को भी मारने पर उतारू थे. इस घटना का जो वीडियो फुटेज सामने आया है उसमें एक व्यक्ति युवती से कहा रहा है कि ' मैं तो इसको गाड़ दूंगा, तेरे को भी काट दूंगा. ' 

शुक्र है उस वक्त मंदिर में तैनात सब इंस्पेक्टर गगनदीप सिंह घटनास्थल पर पहुंच चुके थे. 

गगनदीप (फ़ोटो - फेसबुक) 

उन्होंने बिना डरे हिंसक भीड़ से उस युवक को बचाया. भीड़ इतनी गुस्से में थी कि एक बार को लगा कि वह गगनदीप को भी मारना शुरू कर देगी. लेकिन गगनदीप ने अपनी जान की परवाह किये बिना उस युवक को बचा लिया. पूरी घटना के दौरान गगनदीप ने उस युवक को सीने से लगाकर पकड़े रखा ताकि उस पर कहीं से भी हमला न हो सके. 

जबकि वहां उपस्थित अन्य पुलिस वाले गगनदीप जैसे नहीं थे. उनका इस घटना के बाद वही रवैया सामने आया जो वहां उपस्थित हिंसक भीड़ का था. उनमें सिर्फ गगनदीप ही ऐसे थे जिन्होंने अपनी जान पर खेलकर उस युवक को बचाया.

गगनदीप की बहादुरी पर तमाम तरह की प्रतिक्रियाएं आ रही हैं. किसी के लिए वह नायक हैं तो किसी के खलनायक. लेकिन ईमानदारी से देखा जाये तो इस वक्त गगनदीप साम्प्रदायिक बदहाली से जूझ रहे भारत में बेहतरी की एक उम्मीद के रूप में उभरे हैं. आज जहां भारत साम्प्रदायिकता की गर्त में डूबता जा रहा है.

फ़ोटो - इंडिया टुडे 


वहां गगनदीप जैसे लोग उम्मीद जगाते हैं कि धर्म के नाम पर देश को तोड़ना संभव नहीं है. लोग किसी धर्म विशेष का होने से पहले इंसान हैं. उनमें आज भी मानवता बची हुई है. वो बगैर धर्म और जाति देखे , हर उस इंसान के पक्ष में खड़े होते हैं जिनके साथ गलत हो रहा होता है. 

चंद धर्मांध और साम्प्रदायिक लोग अपनी लाख कोशिशों के बावजूद भी न तो देश को तोड़ सकते हैं न ही मानवता की हत्या कर सकते. जब भी ऐसी कोशिशें होंगी कोई न कोई गगनदीप आगे आता रहेगा.









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