तुतनखामेन के बिना मिस्र की कहानी अधूरी लगती है।

By - सूरज सरस्वती


फ़ोटो - गूगल 

"तुतनखामेन" मिस्र की कहानी इस नाम के बिना अधूरी लगती है। तुतनखामेन मिस्र के फराहो अखनातन का पुत्र था। कई जगह पर तूतनखामेन की माँ नेफरतिती को बताया गया है। कई जगह बताया जाता है कि तूतनखामेन की माँ नेफरतिती की बहन थी। नेफरतिती अखनातन की सौतेली बहन और पत्नी थी। तुतनखामन का असली नाम था "तुतनखातेन" जिसका अर्थ होता है "सूर्य का जीवित प्रतिरूप" बाद में इसे परिवर्तित कर "तुतनखमेन" कर दिया गया जिसका अर्थ होता है "चंद्रमा का जीवित प्रतिरूप"। 

9 वर्ष की उम्र में तुतनखामेन मिस्र के सिंघासन पर बैठा। अल्पायु और अनुभवहीन राजा को उनके निजी सलाहकार एवं चाचा अई ने उसका मार्गदर्शन किया। जब तुतनखामेन राजा बना तो उसने अपनी सौतेली बहन अंखसुनामन से विवाह कर लिया। उनकी दो अजन्मी बच्चिया थी जिसमे से एक गर्भ में 5 महीने में और दुसरी ने 9 महीने में दम तोड़ दिया। ये जानकारियां उनकी ममी से प्राप्त होती हैं।

तुतनखामेन ने अपने पिता के आदेश के विरुद्ध जा कर कई नियमों में परिवर्तन कियें। सूर्य देव की पूजा बंद करवा कर चंद्रमा की पूजा पर ज़ोर दिया। उसने उसके राज्य की राजधानी को पुनः थेबेस में बसाया और अखनातन के शहर को तबाह कर दिया। तूतनखामेन ने थेबेस में चंद्रमा के कई मंदिरों का निर्माण कराया था। तुतनखामेन ने अन्य राज्यों से उसके पिता से बिगड़ते रिश्तों को फिर से सुधारा था। 

19 वर्ष के राजा तुत (तूतनखामेन का एक नाम) की रहस्यमयी तरीके से मौत हो गयी थी।  उसकी मौत आज भी एक रहस्य बनी हुई है। हालांकि माना जाता है उसकी हत्या हो गयी थी। कई जगहों पर कहा गया है कि उसकी मौत का कारण मलेरिया था। मिस्रवासी अपने राजाओं को देव अंश मानते थें। उनका मानना था कि देवता मृत्यु के बाद भी जीवित रहते है।

तुत के शव को औषधियों एवं मसालों से युक्त कर ममी में बदल दिया गया। उसके शव को छोटे बड़े आकार के तीन ताबूतो में रखा गया। सबसे छोटे ,सोने से बने ताबूत में शव रखा गया , उसमे सोने का सिंहासन ,रथ ,तलवार आदि वस्तुए रखी। मिस्त्रवासियों का मानना था कि वे वस्तुए राजा के काम आयेगी। फिर मकबरे को लुटेरो से बचाने के लिए पक्का बंद कर दिया गया। प्राय: राजाओ के मकबरे लुटे जाते थे उन्होंने रोकथाम के लिए मकबरों के नकली रास्ते बनाये। बड़े बड़े पत्थर रखवाए और दरवाज़ों पर अभिशाप लिखवा दिए।

1922 तक तुतनखामेन का मकबरा सुरक्षित रहा था। हार्वर्ड कार्टर नामक पुरातत्वविद को पूरा विश्वास था कि राजा तुत का मकबरा कही सुरक्षित है। वह अपने कारवा के साथ राजाओं की घाटी में पहुँचा। कई वर्षों की खोज के बाद उन्होंने मकबरा तो खोज निकाला लेकिन कहते है उस पर अभिशाप लिखा था “राजा की शान्ति भंग करने वाले के लिए मौत आयेगी ” । इसमें कितना सच था कितना झूठ , यह तो नहीं पता लेकिन कहते है कि खोजी दल के सदस्य स्वाभाविक और अस्वाभाविक कारणों से मारे गयें।






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