भिखारियों का डॉक्टर अभिजीत।



By - अली



भिखारियों को प्रायः समाज हेय दृष्टि से देखता है। उस समाज में हम और आप जैसे ही लोग होते हैं। अक्सर एक भिखारी जब भी बीमार पड़ता है तो वो सरकारी अस्पताल में जाता है जहाँ पर एक तो वो ठीक होता है या फिर सबकी तरह मर जाता हैं। हम कभी अगर रास्ते से गुजर रहे होते है और अनजाने में ही सही कोई भिखारी हमें दर्द में कहारता हुआ दिख गया तो हम उसे पैसे दे देते है और फिर वहाँ से चल देते हैं। लेकिन इस दुनिया में हमेशा से जब भी मानवता मरती है या फिर मरने के कगार पर होती है तो उसे सुधारने के लिए हम में से ही कोई एक इंसान ऐसा काम कर देता है जो हमारे दिल में दुसरो के लिए बसे सहानुभूति को जगा देता हैं। इसी कड़ी में आपको ले चलते है महाराष्ट्र के पुणे जिले में।

इंसानों और जानवरों के डॉक्टर तो आपको हर नुक्कड़ पर मिल जाएंगे लेकिन इंसानियत को अपना धर्म मानकर सड़क के भिखारियों का इलाज करनेवाला डॉक्टर शायद ही आपने कही देखा होगा । पुणे के डॉ. अभिजीत सोनवणे के दिन की शुरुआत ही मंदिर और मस्जिद के बाहर बैठे भिखारियों के इलाज के साथ होती हैं, वो हर दिन सुबह 10 बजे से लेकर 3 बजे तक मंदिर और मस्जिद घूमकर उसके बाहर बैठे भिखारियों का इलाज करवाते हैं। 




अपनी एक छोटी सी बैग में पूरा अस्पताल लेकर घूमनेवाले डॉ.अभिजीत केवल सड़क पर ही इनका इलाज नहीं करते बल्कि ज़रूरत पड़ने पर उन भिखारियों को वो किसी अस्पताल में भर्ती करवाकर ज़रूरी इलाज को पूरा करते हैं और उस इलाज का पूरा पैसा वो अपनी जेब से खर्च करते हैं। अपने सप्ताह को उन्होंने भगवान के दिनों के मुताबिक़ बाँट रखा हैं और उसी हिसाब से वो हर दिन उस भगवान के मंदिर पहुँच जाते हैं ताकि वो ज़्यादा से ज़्यादा भिखारियों का इलाज कर सके। जुम्मा के दिन ये आपको किसी मस्जिद के बाहर नज़र आएंगे तो वही शनिवार के दिन किसी हनुमान मंदिर के पास। 


अभिजीत सोनावणे एक मरीज के साथ।

पिछले दो सालों से वो इसी तरह गरीबों की मदद करते आ रहे हैं आलम तो ये हैं वो उन सब भिखारियों को अब नाम से पहचानने लगे हैं और उन भिखारियों की माने तो डॉक्टर भी अब उनके परिवार के एक सदस्य की तरह बन गए हैं।

अपने इस काम को अभिजीत ने खुद एक नाम भी दिया हैं Doctor For Beggers यानिकि भिखारियों का डॉक्टर और साथ ही सोहम ट्रस्ट नाम से एक संस्थान भी खोल रखा हैं जिसके तहत वो इस पहल को अंजाम दे रहे हैं। 

डॉ.अभिजीत तो मिडिया से बात करने से भी कतराते हैं ये सोचकर की कही समाज ये समझने न लग जाए की डॉक्टर साहब दिखावे के लिए ये सब कर रहे हैं। इक्कीसवी सदी में एक तरफ जहाँ मैले कुचले कपडे देख इन भिखारियों की घृणा करनेवाले हम जैसे लोग खड़े होते हैं तो उसी समय डॉ.अभिजीत जैसे कुछ लोग भी हैं जो इन्हीं भिखारियों को अपना परीवार मानकर इनके साथ इनके बीच बैठकर इनकी मदद करते हैं।





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