रवीश के रिपोर्ट के बाद क्यूट भक्तो में खलबली।



क्रेडिट - गूगल


जब प्रधानमंत्री ने 100 प्रतिशत बिजलीकरण करने का ट्वीट किया तो इसका साफ़ सन्देश था कि अब बिजली हर जगह है और ये भाजपा सरकार की सबसे बड़ी उपलब्धियों में से एक है।

सरकार के अनुसार 18000 गाँव में बिजली पहुंचा दी गयी है लेकिन कितने घरो तक ये पहुंची , ये बहुत ही सुविधा अनुसार छुपा दिया गया और ट्वीट नहीं हो पाया।

जब अखबारों ने तथ्यों की जांच की तब खेल समझ में आया और उसके बाद लेख और ट्वीट्स की बारिस हो गई।

इकॉनमिक टाइम्स में सरकार का क्लैरिफिकेशन छपा है जो विवाद आने के बाद आया , नहीं होता तो ये भी नहीं आता।अखबार ने छापा है की 

"The government today sought to clarify on the debate over village electrification saying the definition mandates electrification of at least 10 percent households in a village but does not imply restricting household electrification only to 10 percent."

यानी किसी गाँव में १० प्रतिशत घरो में बिजली पहुँच गयी तो उसको पूर्ण बिजलीकरण मान लिया जाएगा लेकिन ये रेस्ट्रिक्शन १० प्रतिशत से ज्यादा भी हो सकती है। ये परिभाषा आज से नहीं है , कांग्रेस काल से ही है।

कुल १८,४५२ गाँव में बिजली पहुंचाने की बात की गयी है जिसमे कुल ४६ महीने लगे , यानी औसतन ४८१३ गाँव हर महीने , इसको कांग्रेस काल में हुए बिजलीकरण से कम्पयेर करेंगे तो इस सरकार की इनएफीसिएन्सी पता चलेगी।
कांग्रेस का एवरेज २००५-१४ के बीच १२००० प्रति वर्ष का था।

रविश की रिपोर्ट 

रविश ने अपनी रिपोर्ट में एक किताब का जिक्र करते हुए कहा और तीन गाँव के उदाहरण दिए , भक्तो ने इसको पकड़ लिया और कहा रविश सिर्फ तीन गाँव के लिए रो रहे है , हे भक्तो , रविश ने सिर्फ उदाहरण दिया था।

एक और उदाहरण का मजा यहाँ लो , Assam Power Distribution Company Limited (APDCL)  ने एक आधिकारिक बयान जारी करके कहा है कि जिन १७० गाँव का सेलेक्शन इस योजना में हुआ था उसमे से अभी ३० गाँव में बिजली नहीं पहुंची है।

उसके बाद मध्य प्रदेश के मंत्री का बयान भी आया और भी मजा लेना है तो जा कर बिहार में भी लो जहाँ बिजली नहीं पहुंची , गूगल करोगे तो जानकारी मिल जायेगी।

जिस देश का ऊर्जा मंत्री नासा की दिवाली वाली इमेज ट्वीट करके बिजलीकरण पे अपनी पीठ थपथपाता है , उससे पूर्ण सत्य की उम्मीद बेईमानी है।

सत्य ये है जो सरकार 94 फीसदी बिजलीकरण करके डांस नहीं करती है , उसी सरकार के कामो की बैसाखी लेकर 6% का गुणगान करना , एक क्यूट घटना है और वो भी जब उस 6% में भी कमी है , उसको 100% से मत आंकिये , फ्रैक्शन दिखा कर लोगो को बेवकूफ बनाया जा सकता है।

खेल समझिये , इतनी जल्दी क्यों हुई ट्वीट करने में ? कर्नाटक का चुनाव है माथे पे , तो ऐसे और फर्ज़ीवाड़े के लिए तैयार रहिये , जो फजीहत सरकार की जम्मू, त्रिपुरा और यूपी में हुई है उसके बाद सरकार को कुछ तो क्रेजी करना था , लेकिन चोपा हो गया।

बिजलीकरण गाँव का करके आप सिर्फ 10 प्रतिशत घरो को बिजली दे रहे है , पूरे गाँव को नहीं और यही खेल कांग्रेस भी खेलती थी लेकिन वो नाची नहीं इसको लेकर।

जिस दिन पूरे घर में पहुँच जाए , उस दिन मैं भी सड़क पे नाचूंगा , जैसे आज मोदी के क्यूट समर्थक नाच रहे है और रविश को गरिया रहे है। रविश बहुत सही कर रहा है , ऐसे ही रहो क्यूंकि सर्विसिंग होते रहना चाहिए।

हाँ और एक बात , सांसद ग्राम योजना का क्या हुआ ? कितने गाँव स्मार्ट गाँव बने कोई खबर क्यूंकि RTI में इसका जवाब नहीं दिया जा रहा है।



धैर्यकांत एक मस्तमौला लेखक हैं। लेखन में ये सिर्फ एक विषय तक सीमित नहीं है इनके फेसबुक वॉल पर आपको अलग अलग तरह के लेख पढ़ने को मिल जायेंगे। कीर्ति आजाद से इनका रिश्ता दिल्ली के घनघोर फोग की तरह है जिन्हें ये पसन्द नही करते। #लहेरिया नाम से ये एक फ़ेसबुक पेज चलाते है। फिलहाल ये एक वेबसाइट से जुडे हुए है और एक RTI एक्टिविस्ट है।



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