पूर्व डकैत इन चंबल 2019 में प्रतापगढ़ से लोकसभा चुनाव लड़ेगी।




सीमा यादव (Photo - facebook) 


बचपन के 6 साल डकैतों के बीच गुजारने वाली दस्यु सुंदरी सीमा यादव अब समाज सेवा करना चाहती हैं। वो प्रतापगढ़ से लोकसभा चुनाव 2019 में उम्मीदवार रहेंगी।

इसके पहले वो  2017 के यूपी चुनाव में निर्धन समाज पार्टी ऑफ इंडिया से प्रत्याशी बनकर उतरीं थी।

दैनिक भास्कर को दिए गए एक इंटरवयू में उन्होंने  12 की उम्र में डाकू बनने के बाद बीहड़ में बिताए दिनों की बातें शेयर कीं।

कानपुर देहात के सिकंदरा थाना अंतर्गत महरूपुर गांव की रहने वाली पूर्व दस्यु सुंदरी सीमा यादव ने बताया, "मेरे 11 साल के होते ही पिता जुलुम सिंह ने शादी तय कर दी। 




अक्टूबर 1998 में इटावा के भवानीपुर गांव निवासी कल्लू सिंह से मेरी शादी हो गई। वो 25 साल का था और मैं 11 की। दहेज में एक साइकिल, 25 हजार रु. कैश और एक रिस्टवॉच समेत घर के सारे सामान दिए गए थे।" घर पर आते थे डकैत  सीमा ने बताया, "शादी के एक हफ्ते बाद मेरे घर दर्जनभर बंदूकधारी पति और ससुर से मिलने आए। मैं हैरान थी कि ये डकैत यहां क्या कर रहे हैं। मैंने डरते हुए पूछा तो मुझे चुप करवा दिया गया। मैं जब मायके गई और यही बात पिता को बताई तो उन्होंने कोई ध्यान नहीं दिया।"

"ससुराल में आए दिन डकैत आते-जाते थे। एक रात दो दर्जन से ज्यादा डकैत आए। मेरे पति ने मुझसे सभी के लिए खाना पकाने को कहा तो मैंने मना कर दिया। इसपर मुझे इतना मारा गया कि मैं बेहोश हो गई। कोई मुझे बचाने नहीं आया।"

 "मुझे डकैतों का आना पसंद नहीं था। मैंने पति से कहा कि उन्होंने ये सब नहीं रुकवाया तो मैं पुलिस कंप्लेंट कर दूंगी। इस बात पर उसने मुझे बहुत मारा। अगर उस दिन मुझसे मिलने मेरा मुंह बोला भाई गंभीर सिंह न आता तो मैं मर जाती। गंभीर थोड़ा दबंग था और ससुरालवाले उससे डरते थे। उसकी धमकी पर मेरे साथ मारपीट बंद हुई।" 60 हजार में बेच दिया डकैत को, 12 की उम्र में बन गई चंबल की डकैत - "शादी के करीब 7 महीने बाद ही पति ने मेरा सौदा सलीम गैंग के मुखिया से कर दिया। जब उसने मेरे भाई गंभीर के बारे में सुना तो खरीदने से मना कर दिया। 1999 में पुलिस एनकाउंटर में मेरा भाई मारा गया और मेरे बुरे दिन शुरू हो गए।"




"एक दिन मेरे पति ने सारी हदें पार करते हुए मुझे जहर मिली दाल पिलाने की कोशिश की। मेरे शोर मचाने पर पड़ोसी इकट्ठा तो हुए, लेकिन तब तक मैं बेहोश हो चुकी थी। होश आया तो मैं किसी चंदन यादव के घर थी। चंदन उस समय का नामी डकैत था। उसने बताया कि मेरे पति ने मेरा सौदा 60 हजार रुपए में कर दिया है। 12 साल की उम्र में मैं डकैतों के बीच फंस चुकी थी।"


"मैंने उसके हाथ पैर-जोड़े तो उसने मेरे पिता से 5 लाख रुपए और 5 बीघा जमीन की मांग की, लेकिन उन्होंने देने से मना कर दिया। इसके बाद उसने मेरे हाथ में भी हथियार पकड़ा दिए और मुझसे डकैती करवाने लगा।"

उसके बाद से लेकर 2005 में चंदन के एनकाउंटर तक सीमा जी डकैत रहीं। चंदन के एनकाउंटर के बाद उन्होंने आत्मसमर्पण कर दिया. इस दौरान सीमा जी से शुरुवाती 6 महीनों  के भीतर 200 से ज्यादा लोगों को लूटवाया गया , कई मर्डर करवाए गए , जिनकी ठीक गणना नहीं मालूम है और मार्च 2000 में उनके हाथों 7 गांवों में आग लगवाई गई  , जिसमें दर्जनों लोग जिंदा जल गए और सैकड़ों झोपड़ियां खाक हो गईं।


आत्मसमर्पण करने के बाद सीमा जी 7 साल जेल में रही और अब राजनीति के क्षेत्र में उतर कर समाज सेवा करना चाहती हैं। इससे पहले उन्होंने जो भी किया वो सब अपनी परिस्थितियों से मजबूर होकर किया।

बाकी प्रतापगढ़ जो कि लोकतंत्र के दौर में भी राजाओं और गुंडों का गढ़ है। वहां सीमा जी हारेंगी या जीतेंगी ये तो वक्त बताएगा। लेकिन एक बात तय है कि महिला होकर ऐसे क्षेत्र से चुनाव लड़ना बहुत हिम्मत का काम है। अगर वो जरा भी बढ़त में दिखी तो उनकी जान पर खतरा तय है। लेकिन सीमा जी खतरों की खिलाड़ी हैं। उन्हें अपनी जान की परवाह नहीं है। वो कहते हैं न ...लोहा ही लोहे को काटता है। इसलिए ज्यादा दिक्कत की बात नहीं है। कुल मिलाकर , इस बार वहां का चुनाव रोचक होने वाला है. नज़र बनाये रखियेगा।









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