कल अब्दुल रहीम की पुण्यतिथि थी। बहुत कम लोग हैं जो उनके बारे में जानते हैं।


By - प्रद्युमन यादव


फ़ोटो - स्पोर्ट्स का कीड़ा

अब्दुल रहीम भारतीय फुटबॉल टीम के 1950 से लेकर 1963 तक कोच रहे हैं. उन्हें आधुनिक भारतीय फुटबॉल का प्रणेता माना जाता है. इतना ही नहीं उनके मार्गदर्शन के दौर को भारतीय फुटबॉल टीम का स्वर्ण युग कहा जाता है. उनके मार्गदर्शन में भारतीय टीम जिस तरह खेली वैसा न उससे पहले खेल पायी न उसके बाद.

अब्दुल रहीम के मार्गदर्शन में भारतीय फुटबॉल टीम ने 1951 और 1962 का एशियन गेम जीता जो बड़ी उपलब्धि थी. 1962 का गेम तो इतना दिलचस्प था कि उसे 1 लाख लोगों की भारी भीड़ देखने पहुंची थी जिसमें भारत ने साउथ कोरिया को फाइनल मैच में हरा कर शानदार जीत हासिल की थी. 

सयैद अब्दुल रहीम ( फ़ोटो - स्पोर्ट्स का कीड़ा ) 

लेकिन इससे भी बड़ी उपलब्धि थी भारतीय फुटबॉल टीम का ओलंपिक में पहुंचना. 1956 के मेलबर्न ओलंपिक के लिए भारत ने न सिर्फ क्वालीफाई किया बल्कि सेमीफाइनल तक भी पहुंची. मेलबर्न ओलंपिक में उसे दुनिया भर की टीम्स में चौथा स्थान मिला. यह भारतीय फुटबॉल टीम की अब तक की सबसे महानतम उपलब्धि है. 

अफसोस की बात है कि अब्दुल रहीम की 1963 में मृत्यु के बाद भारतीय फुटबाल टीम का वो रुतबा बरकरार नहीं रहा जैसा अब्दुल के दौर में था. अब्दुल की मृत्यु के बाद भारत में अब्दुल और फुटबॉल दोनों को भुला दिया गया. हां , आगे चलकर सुनील छेत्री जरूर स्टार के रूप में उभरे लेकिन उनके नेतृत्व में टीम की सबसे बड़ी उपलब्धि एएफसी एशियन कप के लिए क्वालीफाई करना ही रही. अब्दुल के बाद अब्दुल जैसा या उनसे बेहतर पिछले 55 सालों में अब तक नहीं मिल पाया है.









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