भारतीय राजनीति बहुत सेक्सी चीज़ है।


By - प्रवीण



फ़ोटो - गूगल 

भारतीय राजनीति बहुत सेक्सी चीज़ है इतनी सेक्सी की यहाँ पर कब किसको भूला दिया जाए इसका कोई अंदाज़ा नहीं लगा सकता है, लाल कृष्ण आडवाणी जी से मुझे ख़ास सहानुभूति है। मुझे आडवाणी जी मुझे भारत के स्टीव जॉब्स लगते हैं जिन्हें उस कंपनी से निकाल दिया गया जिस कंपनी को उन्होंने बाज़ार में खड़ा किया था। भगवान श्री कृष्ण के बाद दूसरी रथ यात्रा जो फेमस हुई वो आडवाणी जी की रथ यात्रा है, लेकिन बस यहाँ पर सारथी के हाथ में सत्ता है और आडवाणी जी एक ऐसा एकांत जीवन व्यतीत कर रहे हैं जो डराने वाला है। 

आडवाणी जी मुझे एक प्रेमी की तरह दिखते हैं जिन्होंने अपनी पार्टी, विचारधारा और अपने पोर्टफोलियो से इश्क़ किया लेकिन ये सभी प्रेमिका कब तक रुकती। आडवाणी जी ने भारत के प्रधानमंत्री की कुर्सी ख़ुद ठुकराई और इसका पछतावा उन्हें आजतक होगा। जिस व्यक्ति के पास पंचवटी पहुँचने का मौका हो और वो उस कुर्सी पर लात मार दे।

लाल कृष्ण आडवाणी को शायद एक मौका दिया जाना चाहिए कम से कम एक सम्मान जनक विदाई के हक़दार है वो। मुझे कई बार लगता है कि आडवाणी जी राजनीति के वीरेंद्र सहवाग हैं जिन्होंने हर राजनीतिक बाउंसर पर गेंद बाउंडरी लाइन से बाहर पहुंचाई लेकिन उन्हें एक सम्मानजनक विदाई नहीं मिल पाई। आज आडवाणी जी को हर सावर्जनिक मंचों से दरकिनार सा कर दिया गया है। मार्गदर्शक मंडल बनाने के नाम पर वरिष्ठ नेताओं की अनदेखी है, ऐसा लग रहा है बुजुर्गों को ज़बरदस्ती ओल्ड एज होम में छोड़ दिया गया है जबकि वो अपने बच्चों को अपने अनुभव का आशीर्वाद देना चाहते थे। 

अकेलापन हर व्यक्ति की नियति है और उसे वो भोगना ही पड़ता है। इसके लिए आँसू बहाने की ज़रूरत नहीं है लेकिन एक गहन चिंतन मनन की आवश्यकता है जिससे कि हम अपने अनुभवी बुजुर्गों का सम्मान कर सकें और उनके द्वारा की गई गलतियों को ना दोहराया जाए। आज जब भारत के सबसे लोकप्रिय प्रधानमंत्री में से एक श्री अटल बिहारी वाजपेयी जी हॉस्पिटल में एडमिट हैं और जब आडवाणी जी की उनको विजिट करने की तस्वीरें सामने आई तो मुझे लगा कि इशारों में ही सही आडवाणी जी और अटल जी के बीच कुछ तो बात हुई होगी।

आडवाणी जी एक सम्मानित रिटायरमेन्ट डिज़र्व करते हैं और वो इसके प्रबल हक़दार हैं। शायद मीडिया और सोसल मीडिया में जो उनका मज़ाक बनाया जाता है वो नहीं बनाया जाना चाहिए।

अगर उन्होंने प्रधानमंत्री बनने का सपना कभी देखा होगा तो वो ग़लत नहीं है, सपनें देखना कभी ग़लत नहीं होता है।







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