कविता : माएं जादूगर होती हैं



फ़ोटो - मैं थिंकर




माएं भी जादूगर जैसी होती हैं! 
10 रुपए की कमाई में 
12 रुपए का खर्च चला लेती हैं 
और उसी 10 रुपए में से 
3 रुपए बचा भी लेती हैं 
उस वक्त के लिए 
जब हम बिना सोचे-समझे 
बिना हिसाब-किताब किए 
कभी भी माँग लेते हैं रुपया।  
  
ये भूल जाते हुए कि 
10 में 12 और 12 में से 15 
कैसे निकलेगा, 
हमारी गणित कमज़ोर है 
या कमज़ोर दिखाने का बहाना करते हैं, 
लेकिन हर बार ऐसा नहीं होता 
कि उसी 10 से 12 और 15 बने। 

कभी-कभी 
सोनार की दुकान से भी 12 और 15 
बनता है 
और उसके बदले 
कभी उनका पांव 
कभी हाथ, कभी गला 
तो कभी कान-नाक 
सूना हो जाता है, 
सच में 
माएं जादूगर होती हैं।



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