आत्महत्या का रहस्य रह जाना।




लोगों को आत्महत्या नहीं करनी चाहिये। किसी का यूँ ख़ुद से हार कर अपने आपको ख़त्म कर देना , समस्याओं का अंत नहीं है। ये निर्णय कई समस्याओं को जन्म देने का कार्य करती हैं। मृत्यु निश्चित है आज नहीं तो कल सभी का अंत होना है किन्तु इस तरह प्रकृति के नियम के विरुद्ध जाना गलत है। 


फ़ोटो - डीएनए इंडिया


लोगों को बात करनी चाहिए। परिवार से , दोस्तों से हर इंसान ने। अगर वो बात नहीं करता है तो हमें एक कदम आगे आकर उससे उसकी परेशानी पूछनी चाहिए। कोई परेशानी ऐसी नहीं होती है जिसका बात कर के हल न निकाला जा सके। लेकिन लोग डरते हैं बात करने से कि अगर मेरे इस कृत के बारे में दूसरों को पता चला तो मेरी बदनामी होगी , मेरा अपमान होगा , परिवार टूट जाएगा। उसके बाद ऐसे निर्णय लेते हैं। ये सारी चीज़ें तो इस निर्णय के बाद भी हुईं। समाज बहुत भुलक्कड़ होता है। आज की चीज़ कल तक याद नहीं रखता है। लेकिन किसी का जाना , किसी ऐसे का जाना जिसे अपने करीब महसूस किया गया हो , जिसके साथ बहुत वक़्त गुज़रा हो।  उसका यूँ बिना कोई ख़बर दिए चले जाना ये सोच कर कि मेरे जाने से सब ठीक हो जायेगा। ऐसे वक़्त बात करना ज़रूरी हो जाता है।  


कहते हैं कि यदि कोई आत्महत्या करना चाहता है तो उसे उसी कृत्य के लिए उकसाओ। वो आपसे घृणा करने लगेगा लेकिन वो आत्महत्या का विचार त्याग देगा। लेकिन इसके लिए ज़रूरी है कि आपको पता तो हो कि वो आत्महत्या के बारे में सोंच रहा है।  अगर आपको पता ही न हो और उसने ऐसा काम कर लिया तो ? हम ख़ुद को कहीं न कहीं दोषी मानने लगते हैं पुरानी स्मृतियों को सोंच के कि कहीं मेरे कुछ कहने से तो वो क्षुब्ध नहीं हो गया। काश मैं उससे इसके लिए माफ़ी मांग पाता।

आत्महत्या से बड़ा कष्ट है उसके कारण का रहस्य रह जाना। परिवार , मित्र सब अपने हिसाब से उस कारण को तलाशने की कोशिश करते हैं। कहीं न कहीं हर इंसान ख़ुद को दोषी भी मानने लगता है।

ऐसी कौन सी नकारात्मक शक्ति होती है जो इस क़दर हावी हो जाती है इंसान के ऊपर जो वो ऐसा क़दम उठाता है। ऐसा कहना ग़लत होगा कि आत्महत्या करना बुज़दिली है। क्यों की ट्रेन की पटरी पर लेट कर भी लोग वापिस आ जाते हैं।  लेकिन कुछ वापिस नहीं आते हैं। 

इतनी हिम्मत इतनी ताकत का उपयोग एक नकारात्मक कार्य के लिए करना कहाँ तक सही है ?

मुझे नहीं पता इसमें किस शक्ति का हस्तक्षेप होता है। कौन सी ताकत मस्तिष्क की सोचने समझने की क्षमता को क्षीण कर देती है ? बस यही कह सकता हूँ बात कीजिये।

हर समस्या का समाधान हो सकता है। उसके लिए ऐसे कदम उठाना गलत है। 









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