सुना है लोग इस औरत को आँख भर के देखते हैं।



फ़ोटो - गूगल नोर्मा जीन मोर्टेन्सन "मर्लिन मुनरो" (1 जून 1926 -  5 अगस्त 1962)

"मर्लिन मुनरो" इस नाम से काफ़ी गहरा रिश्ता है। 11वीं में था। जब इनकी फिल्म "सम लाइक इट हॉट" देखी थी। फिल्म ब्लैक एंड व्हाइट थी। जब शुरुआत हुई तो ख़्याल आया कि आख़िर क्यों मैं ये बोरिंग सी फिल्म देख रहा हूँ। 60 के दशक में संगीत और कॉमेडी पर बनी थी। मुझे लगा मैं ये फिल्म नहीं देख पाऊंगा। बात वही थी कि इतनी पुरानी फिल्म में ऐसा क्या था जिसे मैं देखूं ? वो कोई और नहीं मर्लिन थीं। जिन्होंने मुझे अपने इर्द गिर्द कुछ यूँ बांधा की मैं अपने आप को अलग कर ही नहीं पाया। वो जादू था उनके चेहरे में।

मर्लिन मुनरो हॉलीवुड की सबसे ख़ूबसूरत अदाकाराओं में शुमार थीं। बहुत ही कम वक्त में उन्होंने इतनी प्रसिद्धि पा ली थी जिसका उन्हें भी अंदाज़ा था। वो तो चाहती ही थीं की दुनिया उन्हें याद रखे। वो सबके दिलों पे राज करना चाहती थीं। लेकिन वो महज़ फ़िल्मी दुनिया की सेक्स सिंबल बन के नहीं रहना चाहती थीं। उन्होंने कहा था कि लोग उन्हें जीन मुनरो के नाम से जाने लेकिन उन्हें भी एहसास था कि ऐसा कभी नहीं होगा। वो एक अभिनेत्री के तौर पे दुनिया में ख़ुद को स्थिर करना चाहती थीं न की किसी कामोत्तेजत वस्तु के रूप में। जैसा की उनके साथ हुआ।

फ़ोटो - आज तक 

परदे पर मर्लिन का किरदार उनके असल जीवन के किरदार से बेहद जुदा था। उन्होंने उस छोटी सी उम्र में इतना कुछ अनुभव कर लिया था जो किसी और के लिए एक अदृश्य स्वप्न के सामान हो। परदे पर हमेशा हँसती, मुस्कुराती मासूम सी दिखने वाली मर्लिन निजी ज़िन्दगी में उतनी ही जटिल थीं। मुनरो के प्रेम सम्बन्ध को मशहूर अमेरिकी गायक फ्रैंक सिनात्रा से लेकर अमेरिकी राष्ट्रपति जॉन कैनेडी तक से जोड़ा गया। मर्लिन ने राष्ट्रपति जॉन कैनेडी के जन्मदिन पर उनके लिए "हैप्पी बर्थडे मिस्टर प्रेसिडेंट" गीत भी गया था। 

मुनरो ने परदे पर जितनी प्रसिद्धि पायी थी परदे के पीछे का उनका जीवन उतना ही दर्द भरा और अवसादग्रस्त था। उन्होंने 3 शादियां की और तीनों शादियां ढलते वक़्त के साथ खत्म हो गयी। मर्लिन को डायरी लिखने का शौक़ था। वो लिखकर अपने दिल को तसल्ली देती थीं। ख़ुद को ख़ुश रखने की कोशिश करती थीं। ऐसी बहुत सी चीज़ें थी उनके जीवन की जिसके बारे में वो किसी से कोई ज़िक्र नहीं करती थीं। बस उन बातों के कुछ पन्नों पे कुरेद के सो जाया करती थीं। 

अपने 36 साल के करियर में मर्लिन ने अपने निजी जीवन में बहुत से उतार चढ़ाव देखें। मर्लिन वो थीं जिससे एक वर्ग विशेष नहीं  फिल्म जगत से ताल्लुक़ रखने वाला हर शख़्स प्रेम करता था। चाहे वो फिल्म में काम करने वाला कोई अभिनेता हो या उसे देखने वाला दर्शक। लेकिन फ़िल्मी दुनिया पर राज करने वाली मर्लिन अपनी निजी ज़िन्दगी में अकेली थीं। मर्लिन कभी पैसे कमाने की होड़ में थीं ही नहीं वो सबसे अलग सबसे अद्भुत कलाकार होना चाहती थीं। जो उन्होंने दुनिया को बख़ूबी दिखाया। 

मर्लिन ने अपनी डायरी में हर वो चीज़ लिखी थी जो उन्हें तकलीफ़ देती थी। चाहे वो उनकी शादी टूटने की बात हो या फिर ख़ुद के अवसाद में जाने की बात। लेकिन कहीं न कहीं उनके अंदर कुछ तो था जो उन्हें बाकियों से अलग बनाता था। जैसे उन्होंने एक जगह लिखा था  ''मैं हमेशा किसी की बीवी होने से डरती रही हूं। क्योंकि मुझे पता है कि कोई किसी और को प्यार नहीं कर सकता। तो कल से मैं अपना ख्याल ख़ुद रखना शुरू करूंगी क्योंकि यही मेरी पूंजी है। पहले भी ऐसा था और आज भी ऐसा ही है''।

फ़ोटो - विकिपीडिया

उन्होंने अपनी छोटी सी ज़िन्दगी में ऐसी ऐसी बातों को कलम और कागज़ से जीवंत कर दिया जो किसी आम इंसान के लिए सोचना भी बेमानी होगी। उनके अपने ख़्याल जो ज़िन्दगी के लिए थें वो अपने आप में एक उपलब्धि थी उनके लिए। उन्होंने मर्दों के बीच कभी ख़ुद को कमज़ोर नहीं समझा। उन्हें पता था कि वो इनसे बेहतर हैं और उनसे बड़ी ऊंचाई उनका इंतज़ार कर रही है।  

उन्होंने अपनी लेखनी से लोगों को असल मर्लिन से रु ब रु कराया था।  जो परदे पे लोग शायद कभी नहीं देख पातें। उनकी बातों में कितनी दृढ़ता थी कितना आत्मविश्वास था और कितना दर्द था ये सब बख़ूबी बयां करती थी उनकी कलम "मैं जब बच्ची थी तब मुझे किसी ने कभी यह नहीं कहा कि मैं सुंदर हूं। तमाम बच्चियों को कहा जाना चाहिए कि वे सुंदर हैं, वे सुंदर न हों तब भी। हॉलीवुड में किसी भी लड़की की प्रतिभा उसके हेयर स्टाइल से कम आँकी जाती है। 

आपका मूल्यांकन इस आधार पर होता है कि आप कैसी दिख रही हैं, इस पर नहीं कि आप असल में हैं क्या। हॉलीवुड ऐसी जगह है जहाँ आपको चुंबन के लिए हजार डॉलर्स मिल जाएँगे लेकिन आत्मा के लिए पचास सेंट्स भी नहीं। मैं यह जानती हूँ औऱ मैं महँगा ऑफर ठुकरा देती हूँ और पचास सेंट्स मंजूर कर लेती हूँ।"

वो बिना फेसलिफ्ट के बूढ़ी होना चाहती थीं। वो अपने उस चेहरे के प्रति विश्वासप्रद होना चाहती थीं जिसे उन्होंने स्वयं बनाया था। वो ढलती उम्र को टालना चाहती थीं और अपनी खूबसूरती के साथ अपने ज़िन्दगी की आख़िरी साँसे लेना चाहती थीं। वो जानती थीं कि ऐसा करना या होना सही नहीं हैं। क्यों कि अगर ऐसा होगा तो आप ये कभी नहीं जान पाएंगे कि आप क्या हैं और आगे क्या हो सकते हैं।

मर्लिन का यूँ अचानक चले जाना वैसा ही था जैसे चन्द्रमाँ का अमावस में गुम हो जाना। ऐसा बहुत कुछ था जो वो अपने साथ ख़ामोशी से लेकर चली गयीं।  लेकिन उनके चेहरे की वो मासूमियत हमेशा के लिए लोगों के दिलों में अपना एक स्थान बना गयीं।  



"मेरे लिए सबसे अच्छी बात नींद है, तब कम से कम मैं सपना तो देख सकती हूँ ।"
~ मर्लिन मुनरो




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