एसी ऑफिस छोड़ पानी में कूद बंधा बनवाने वाला IAS.

By - नवनीत मिश्रा



Photo - google 

चाहते तो आइएएस दिलीप सिंह किसी सूखे स्थान पर खड़े होकर अंगुलियों के इशारों से राहत और बचाव कार्य करवा लेते।सिर्फ उन्हें कहना पड़ता-तुम ये करो, तुम वो करो। फिर अर्दली से गाड़ी में रखा तौलिया मंगवाकर चार बार पसीना भी पोंछते। मगर इस अफसर ने शायद आइएएस एकेडमी में मिली ट्रेनिंग को बेफिक्री के धुएं में उड़ाने की जगह उसे अपने कामकाज में उतारने का संकल्प लिया। यही वजह है कि जब हाल में मणिपुर में आई बाढ़ तबाही मचा रही है तो इस आइएएस ने एयर कंडीशंड ऑफिस छोड़ दी। गांव-गांव जाकर यह अफसर खुद पानी में उतरकर कहीं बंधा बनवाता रहा तो कहीं राहत-सामग्री बंटवाने में जुटे रहे।

तस्वीर में ये जो नीली शर्ट और कमर तक पानी में खड़े शख्स हैं, यही आइएएस अफसर दिलीप सिंह है।इन्होंने दिखा दिया कि आइएएस अफसरों को खुद को लॉट साहब नहीं लोकसेवक ही मानना चाहिए। दूसरे अफसरों को भी दिलीप ने बताया कि जिम्मेदारी एयर कंडीशंड कमरों की मुलायम गद्दे वाली कुर्सी की मोहताज नहीं होती, बड़ी लकीर खींचने के लिए सूट-बूट छोड़ गहरे पानी में भी उतरना भी पड़ता है। यह तस्वीर इसलिए भी खास है कि इसमें एक राज्य के बाढ़ नियंत्रक सचिव का पद रखने वाला यह अफसर अपनी जिम्मेदारी को निभाता नहीं बल्कि जीता हुआ दिखाई दे रहा है।

 यह तस्वीर आज के नौजवान अफसरों के लिए प्रेरणा देने वाली है। उन्हें सीखना चाहिए कि संजीदगी और संवेदनशीलता क्या चीज होती है। यूं तो कई बार लोग यह सवाल उठाते हैं कि यह तस्वीरें फकत प्रतीकात्मक होती हैं या फिर अफसर सुर्खियों में आने के लिए करते हैं। जो भी हो, अगर कोई स्टंट के लिए भी करता है तो समाज के लिए ऐसे स्टंट भी जरूरी हैं। साहब के पैर के आसपास एक मच्छर भी दिखने पर जब तमाम आइएएस अफसरों के अर्दली स्प्रे मारने के लिए दौड़ते हों, तब एक आइएएस अफसर का कमर से ज्यादा भरे गंदे पानी में उतरना खास है, उसकी सेवा भावना को सलाम है। वैसे भी यह तस्वीर अफसर ने वाहवाही में अपनी फेसबुक पोस्ट पर नहीं लगाई है, बल्कि यह तस्वीर सामने आई मुख्यमंत्री एन बीरेन सिंह के ट्विटर हैंडल से।

मुख्यमंत्री  को भी साधुवाद कि उन्होंने इस आइएएस की तस्वीर ट्वीट की। हालांकि एक चीज मुझे चुभी कि खुद मुख्यमंत्री ने अपनी जो तस्वीर ट्वीट की है, उसमें वह खुद सूखे स्थान पर खड़े होकर मातहतों को लेफ्ट-राइट करवा रहे। हालांकि मौके पर पहुंचकर राहत की निगरानी करना भी कम बात नहीं।

आखिर में एक अपील-अगर आपके आस-पास कोई अच्छा काम कर रहा हो, चाहे वह राजा हो या रंक, चाहे वह अफसर हो या चपरासी, चाहे वह बूढ़ा हो या छोटा सा बच्चा ही क्यों न हो, उसके अच्छे काम को खुशबू की तरह फैलाइए। बुरे लोगों से ज्यादा अच्छे लोगों की चर्चा करिए। देखिए, हर तरफ सकारात्मकता फैलेगी। एक अच्छे काम को देख कई और लोग अच्छे काम को प्रेरित होंगे।







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