40 साल का अकबर उर्फ रकबर कब्रगाह में लेट चुका है।







40 साल का अकबर उर्फ रकबर कब्रगाह में लेट चुका है, जहां अखलाक, जुनैद, पहलू को सुपुर्द ए खाक किया गया था... लाख दावों के बाद अकबर को न ही सिस्टम बचा सका और न ही सरकार...सबका साथ और सबसे विकास के बीच सत्ताधारी पार्टी के ही फ्रिंज एलिमेंट भस्मासुर बने सड़कों पर घूम रहे हैं...जरा ध्यान दीजिये कत्लखाना खोलने में इन्होंने कितनी तरक्की कर ली है, पहले गाय के नाम पर जालीदार टोपी वालों को मारा रहे थे, अब अपनी ही जात, अपनी बिरादरी, अपने धर्म वालों को बच्चा चोरी करने के नाम पर मार रहे हैं..आप के पडोस तक आग पहुंच चुकी है, आप मॉल और ग्रेट फॉल के चक्कर में पड़े रहिए...अमां, आप हिंदू-मुस्लमान की डिबेट देखकर राम मंदिर के कंगूरे का ईंट बन जाईए...आप न्यू इंडिया के सपने देखते रहिए.

7 बच्चे थे अकबर के सबसे छोटी बेटी 2 साल की है, नाम है असीरा इसी बच्ची को गाय का दूध नसीब कराने के लिए मेवात से अलवर गया था अकबर...दोनों राज्यों में बीजेपी की सरकार. दोनों राज्यों में मोदी जी, अमित जी के विश्वासपात्र बैठे हैं. लेकिन जब वो लौटा तो मारा गया, मारने वाले वही थे जो नेताओं की उलटबासियां सुन सुनकर अपना दिमाग खराब कर चुके हैं. जो धर्म को अपने अस्तित्व का हथियार बना चुके हैं.

अब यकीं मानिए कोई अकबर की बात नहीं करने वाला. कोई उसकी बीबी की बात नहीं करने वाले, कोई ये भी नहीं बताने वाला, कि झांक कर आईए अकबर के आंगन में वहां आपको गाय और बछिया बंधी मिलेगी, क्योंकि मुसलमानों को भी दूध चाहिए होता है भाई. हर मुसलमान गोकशी करने वाला नहीं होता. लेकिन कोई अकबर की बात नहीं करेगा. अकबर को भी हम वैसे ही भूल जाएंगे जैसे जुनैद, पहलू को भूल चुके हैं.

अकबर का परिवार उम्मीद करें भी तो किससे क्योंकि देश का जो पॉलिटिकल माहौल बन चुका है, उसमें मुसलमान हाशिये पर धकेले जा रहे हैं. पॉलिटिकल डिसकोर्स में ईमानदारी से मुसलमानों की बात करना अपराध हो चुका है. बीजेपी से उम्मीद नहीं की जा सकती. कांग्रेस भी सॉफ्ट हिंदुत्व के एजेंडे पर है, उनको तो मुसलमानों की कांग्रेस कह देने पर सफाई देने में जुट गए थे. मुसमलानों की बात करना यानी अपना वोट गंवाना बन चुका है. वो करें भी तो क्या ?? अभी भी जागिए, किसी भी तरह की नफरत करने वालों को जवाब दीजिए, शुरूआत घर से, पड़ोस से ही कीजिए.

समझ लीजिए, जितनी नफरत आप फैलाएंगे, उतना ही भारत के अंदर एक और हिंदोस्ता का जन्म होगा..एक देश के अंदर दो देश कभी पनप नहीं सकते...अगर ऐसा होगा तो हमें अपने शरीर पर एक और जख्म सहने के लिए भी तैयार होना होगा.




यह लेख संजय बिष्ट की फेसबुक वाल से साभार हैं। 





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