भोजपुरी गानों का गिरता स्तर भोजुपरी भाषा के लिए चिंताजनक हैं।





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भोजपुरी गानों का ये रोज का गिरता स्तर और वहाँ के लोगों का अभी भी चुप रहना सच मायने में चिंता का विषय है। आप भोजपुर-भोजपुरी जितना भी कर लो आपके भिखारी ठाकुर को दिनों दिन भुलाया और बदनाम किया जा रहा है।

पहली बार भोजपुरी गानों का विस्तार होते देखा मनोज तिवारी के गानों के माध्यम से, जगह-जगह भोजपुरी सुनने के लिए उनको बुलाया जाता था। उसी समय के आसपास कुछ भोजपुरी अश्लील गाने आये और लोग छुप-छुप कर उन गानों को सुनने लगे। धीरे-धीरे ये धीमी आवाज में चलने वाले गाने डीजे, शादी, ऑरकेस्ट्रा तक पहुंचने लगे और वहां से ये रुके ही नही और सभी सीमाओं को पार कर दिया। 

आज के जितने बड़े (गिरे) भोजपुरी गायक और एक्टर हैं उनके आगे आने और बड़े होने का मुख्य कारण ये ही रहा है- डबल मीनिंग लिरिक्स और उनका घटिया वीडियो। यही वजह है कि फिर ये अश्लीलता बढ़ती गयी और बच्चे बड़े निकल पड़े अपने घटिया गानों में अश्लीलता भर गायक बनने और फिर भोजपुर, भोजपुरी भाषा का अलग ही मतलब निकाला जाने लगा। इसका सबसे बड़ा नुकसान भोजपुरी भाषा को ही हुआ, अच्छे काम कभी निकल के आ ही नही पाए। गौर से देखें तो इसका नुकसान सिर्फ भोजपुरी को ही नही पास के मैथिली, मगही जैसी भाषाओं को भी हुआ है।

ऐसी बात नही है कि आवाज नही उठ रही है, उठती है आवाज पर ये भोजपुरी के नाम पे इतनी गंदगी फैला चुके हैं कि कुछ के आवाज से ये साफ नही होने वाली।

वैसे कब तक चुप रहियेगा, अब भी समय है आवाज तेज कीजिये नही तो ये आपकी भोजपुरी को अपनी घटिया गानों से खा जाएंगे।










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